हिमाचल के टूरिज्म पर मिडिल ईस्ट में तनाव का इम्पैक्ट

शिमला, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का असर अब हिमाचल प्रदेश के पर्यटन कारोबार पर पड़ना शुरू हो गया है। LPG सिलेंडर और पेट्रोज-डीजल की कमी की आशंका ने पर्यटकों और पर्यटन कारोबारियों दोनों को चिंता में डाल दिया है। इससे होटलों में एडवांस बुकिंग रद्द हो रही है और होटल-रेस्टोरेंट कारोबारियों को लाखों रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

प्रदेश में बीते चार-पांच दिनों से कमर्शियल LPG सिलेंडरों की किल्लत है। होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे। ऐसे में जिन होटल कारोबारियों के पास एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक नहीं बचा है, वे खुद पर्यटकों की फूड के साथ एडवांस बुकिंग रद्द कर रहे हैं।

दूसरी ओर, कई पर्यटक भी पेट्रोल-डीजल की संभावित कमी की खबरों के चलते पहाड़ों पर घूमने की योजना बदल रहे हैं और अपनी एडवांस बुकिंग कैंसल कर रहे हैं। इस बीच कुछ होटेलियर ने लकड़ी से जलने वाले चूल्हे खरीदकर भोजना पकाना भी शुरू कर दिया है। कुछ कारोबारी इंडक्शन पर भी खाना पका रहे हैं।

पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि खाड़ी देशों में जारी तनाव लंबा खिंचता है तो आने वाले समर सीजन में हिमाचल के पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है। गर्मियों के महीनों में राज्य की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर रहता है और इसी दौरान होटल, ट्रैवल एजेंसी, टैक्सी ऑपरेटर, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को साल का सबसे ज्यादा काम मिलता है।

50 प्रतिशत तक बुकिंग रद्द, लाखों का नुकसान

शिमला स्थित लैंडमार्क होटल के मालिक राजीव भारद्वाज ने बताया कि चार-पांच दिनों में उनकी 50 प्रतिशत एडवांस बुकिंग रद्द हो चुकी है। इससे उन्हें लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। पर्यटकों के बीच भी पैनिक का माहौल बन गया है। उन्होंने माना कि वास्तविक स्थिति उतनी गंभीर नहीं है। उन्होंने बताया कि एलपीजी की कमी के कारण उन्हें होटल में वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी है।

उन्होंने खाना बनाने के लिए लकड़ी का चूल्हा लगवाया है और इंडक्शन स्टोव भी मंगवाए हैं, ताकि होटल में ठहरे पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके साथ ही होटल के मेन्यू में भी बदलाव करना पड़ा है। लंबे समय में पकने वाले व्यंजन जैसे राजमा और काबुली चना फिलहाल बंद कर दिए गए हैं, जबकि जल्दी तैयार होने वाली दालों और हल्के भोजन को मेन्यू में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में वीकेंड पर होटल फुल रहते थे, लेकिन इस बार कारोबार लगभग ठप जैसा हो गया है।

मनाली में भी चिंता बढ़ी

पर्यटन नगरी मनाली में भी होटल कारोबारियों के बीच चिंता का माहौल है। मनाली के होटेलियर अनूप ठाकुर ने माना कि खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष का असर धीरे-धीरे पर्यटन कारोबार पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि यदि हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए तो आने वाले दिनों में पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है।

अनूप ठाकुर ने सरकार से मांग की है कि पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की आपूर्ति को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने लाई जाए, ताकि पर्यटकों में फैली आशंका दूर हो सके और पर्यटन कारोबार सामान्य बना रहे।

टूरिस्ट को खाने की चिंता नहीं

हिमाचल में कमर्शियल सिलेंडर की कमी से हालात जरूर चिंताजनक है, लेकिन ऐसी स्थिति नहीं है कि टूरिस्ट को खाना न मिल पाए। क्योंकि होटेलियर ने LPG का विकल्प के तौर पर इंडक्शन और लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

पेट्रोल-डीजल की फिलहाल कमी नहीं

हालांकि, पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि राज्य में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कोई बड़ी कमी नहीं है। शिमला के पेट्रोल पंप संचालक अमित नंदा के अनुसार पहले की तरह अतिरिक्त स्टॉक जरूर नहीं मिल रहा, लेकिन जितनी मांग है उतनी आपूर्ति हो रही है और किसी भी वाहन चालक को खाली हाथ नहीं लौटना पड़ रहा।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

एडवांस बुकिंग रद्द होने और गैस आपूर्ति में दिक्कत के बीच हिमाचल होटलियर एसोसिएशन ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एमके सेठ ने सरकार से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि पर्यटन उद्योग पर संकट गहराने से रोका जा सके।

पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति संभाली नहीं गई तो समर सीजन में हिमाचल आने वाले हजारों पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की आजीविका पर पड़ेगा।

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