इंडिया-EU ट्रेड डील ने अमेरिका को डराया, कनाडाई एक्सपर्ट का खुलासा- दिल्ली संग समझौते पर अचानक क्यों नरम पड़े ट्रंप
वॉशिंगटन: भारत को लेकर काफी समय से सख्त दिख रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रेड डील की घोषणा की है। डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है, जो अब तक 50 प्रतिशत था। एक्सपर्ट अमेरिकी सरकार के बदले रुख की एक अहम वजह भारत और यूरोपीय संघ की डील को मान रहे हैं। कनाडाई एक्सपर्ट जैक्स शोर का कहना है इस डील ने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन में बेचैनी पैदा की।
ट्रेड एनालिस्ट जैक्स शोर ने एक इंटरव्यू में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर हुए सवाल के जवाब में कहा, ‘मुझे लगता है कि अमेरिका को भारत-ईयू ट्रेड डील के बाद खुद के पीछे छूट जाने का डर एहसास हुआ हो। इसने अमेरिका को भारत के साथ जल्दी से जल्दी ट्रेड मुद्दे पर बात करने के लिए बढ़ने पर मजबूर किया होगा।’
दो अरब लोगों को नंजरअंदाज करना मुश्किल
जैक्स का कहना है कि भारत और ईयू की डील का दायरा बहुत बड़ा है। यह 2 अरब लोगों के लिए मार्केट बनाता है। इसमें भारत के डेढ़ अरब और यूरोप के 50 लाख लोग शामिल है। इतनी बड़ी संख्या को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए मुश्किल रहा होगा। हमने दिलचस्प तरीके से यह देखा है कि भारत-ईयू डील के तुरंत बाद ट्रंप ने इस डील का ऐलान किया है।दुनियाभर के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारत-यूरोपीय संघ की डील ने अमेरिका पर दबाव के आखिरी पॉइंट की तरह काम किया। इस फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट से दिल्ली को फायदा हुआ और वॉशिंगटन को पीछे छूट जाने का डर सताया। यूरोप और भारत दोनों से टकराव करने से बचते हुए अमेरिका ने भारत के साथ बात बढ़ाई और डील का ऐलान किया।
भारत-ईयू की डील
डोनाल्ड ट्रंप के दिल्ली के साथ व्यापार समझौते के ऐलान के बाद भारत-ईयू की डील चर्चा में है। बीते हफ्ते भारत और यूरोपीय संघ में ट्रेड डील साइन हुई है। यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपियन काउंसिल के एंटोनियो कोस्टा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समझौते का ऐलान किया है। इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है।
EU-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद कई एक्सपर्ट ने ये दावा किया कि यह अमेरिका के बिना प्रभाव वाली दुनिया की उभरती तस्वीर है। यूरोप और भारत के साथ आने और चीन के साथ कनाडा जैसे देशों की बढ़ी नजदीकी ने अमेरिका को तुरंत इस ओर सोचने और जल्दी फैसले लेने के लिए मजबूर किया।
