कानपुर रिंग रोड परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, सितंबर तक पहला चरण होगा तैयार, 2028 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
कानपुर: कानपुर शहर में यातायात का दबाव कम करने और सुगम परिवहन के उद्देश्य से बनाई जा रही कानपुर रिंग रोड परियोजना का कार्य वर्ष 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों ने शुक्रवार को प्रोजेक्ट साइट का निरीक्षण कर यह जानकारी दी।एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, 6 लेन वाली रिंग रोड के पहले चरण का निर्माण कार्य सितंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद शेष तीन चरणों का काम 2027 के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा, जबकि अंतिम पैकेज का कार्य अप्रैल 2028 तक समाप्त होने की संभावना है।
93 किमी लंबी होगी रिंग रोड
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल और परियोजना निदेशक पंकज यादव ने बताया कि कानपुर रिंग रोड की कुल लंबाई 93 किलोमीटर है। इसके तहत 1.45 किलोमीटर लंबी सड़क बनाकर चकेरी एयरपोर्ट को भी रिंग रोड से जोड़ा जाएगा। अब तक परियोजना का करीब 25 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
गंगा पर बन रहा 3300 मीटर लंबा पुल
परियोजना के तहत कुल 6 बड़े पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें बिठूर में गंगा नदी पर 3300 मीटर लंबा पुल, चकेरी में 1100 मीटर लंबा पुल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। ये पुल परियोजना की सबसे अहम कड़ियां माने जा रहे हैं।
ट्रैफिक की रफ्तार तीन गुना बढ़ेगी
अधिकारियों का दावा है कि रिंग रोड के बन जाने के बाद शहर में ट्रैफिक की रफ्तार तीन गुना तक बढ़ जाएगी। फिलहाल हमीरपुर और बुंदेलखंड की ओर से लखनऊ जाने वाले वाहनों को कानपुर शहर के अंदर से गुजरना पड़ता है, जिससे जाम की समस्या बनी रहती है। रिंग रोड बनने के बाद वाहन शहर के बाहर से ही लखनऊ के लिए जाममुक्त रास्ता पा सकेंगे। कानपुर रिंग रोड उन्नाव और कानपुर देहात जिलों से होकर गुजरेगी। लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे को उन्नाव में रिंग रोड से जोड़ा जाएगा, वहीं कानपुर–कबरई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को रमईपुर में रिंग रोड से कनेक्ट किया जाएगा।
अप्रैल से फर्राटा भरेंगी गाड़ियां
एनएचएआई अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे पर केवल 105 मीटर का काम शेष है, जिसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। उम्मीद है कि 20 मार्च तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और अप्रैल से एक्सप्रेसवे को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। एक्सप्रेसवे पर दोनों तरफ रेस्ट रूम बनाए जाएंगे, जिनके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं।
