कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल का जिम्मा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को

भोपाल ।    कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल का जिम्मा फिर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह यानी दिग्गी राजा को सौंपा जा रहा है। प्रत्याशी चयन के बाद वे प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के काम में जुटेंगे। दरअसल, मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जन आक्रोश यात्रा में जगह-जगह आपसी खींचतान सामने आ रही है। कहीं, संभावित दावेदार को लेकर विरोध हो रहा है तो कहीं बाहरी नेताओं को अधिक महत्व मिलने से पार्टी के मूल कार्यकर्ता नाराज हैं।

अभी से डैमेज कंट्रोल की तैयारी

इसका असर पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर न पड़े, इसलिए अभी से डैमेज कंट्रोल की तैयारी की जा रही है। चूंकि, दिग्विजय सिंह ही एक मात्र ऐसे नेता हैं जिनका पूरे प्रदेश में नेटवर्क है और कार्यकर्ताओं को जानते-पहचानते हैं, इसलिए नाराज या घर बैठे नेताओं को मनाने-समझाने का दायित्व उनके पास ही रहेगा।

2018 के विधानसभा चुनाव से पहले भी हुई थी ऐसी कवायद

2018 के विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने संगत में पंगत कार्यक्रम करके कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने का काम किया था। कांग्रेस यह अच्छी तरह से जानती है कि सत्ता में वापसी के लिए कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच समन्वय बनाना होगा। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने पिछले साढ़े तीन वर्ष में योजनाबद्ध तरीके से संगठन का विस्तार किया। मतदान केंद्र स्तर पर संगठन तैयार किया और मंडलम-सेक्टर इकाई गठित की। जिला, ब्लाक और राज्य स्तर पर नेताओं को समायोजित किया।

स्थानीय और जातीय समीकरणों का ध्‍यान

चुनाव और चुनाव अभियान समिति में भी स्थानीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नेताओं को स्थान दिया गया है। भाजपा से जिन नेताओं को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई जा रही है, उनको लेकर स्थानीय इकाइयों से सहमति लेने की अनिवार्य व्यवस्था बनाई है ताकि विरोध होने की सूरत में उनकी भी जिम्मेदारी निर्धारित की जा सके। इतनी सावधानी बरतने के बाद भी जन आक्रोश यात्रा में कुछ स्थानों पर विरोध के स्वर सुनाई दिए हैं।

सुरजेवाला और वरिष्ठ नेता भी करेंगे संवाद

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सह प्रभारी भी जिलों में नेताओं के बीच समन्वय का काम देखेंगे। वे पहले ही साफ कर चुके हैं कि सरकार बनने पर कार्यकर्ताओं को पूछपरख होगा। उन्हें सत्ता में स्थान भी मिलेगा और इसकी जवाबदारी संगठन की होगी।

जन आक्रोश यात्रा पूरी होने के बाद पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव, अजय सिंह सहित अन्य नेता को भी समन्वय बनाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। संगत में पंगत कार्यक्रम में पूरे समय दिग्विजय सिंह के साथ पूर्व विधायक विनय शंकर दुबे उनके सहयोगी की भूमिका में थे।

नाराज कार्यकर्ताओं की सूची बनाकर संवाद

एक-एक जिले में नाराज कार्यकर्ताओं की सूची बनाकर उनसे संवाद किया गया था। वर्तमान में दिग्विजय सिंह और रामेश्वर नीखरा उन 66 सीटों के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुके हैं, जहां पार्टी को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। नीखरा को संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। वे भी दिग्विजय सिंह के साथ रहेंगे।

इनका कहना है

नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए दिग्विजय सिंह और महेश जोशी ऐसे नेता रहे हैं जिनकी डांट और फटकार को भी पार्टी का कार्यकर्ता आशीर्वाद मानता है। महेश जोशी अब नहीं है किंतु दिग्विजय सिंह ही इस कार्य को सबसे बेहतर ढंग से कर सकते हैं। हमारे नेता कमल नाथ जी ने यह दायित्व उन्हें ही सौंपा है।

– केके मिश्रा, अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग

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