बसंत पंचमी पर बैद्यनाथ मंदिर में पूजा का है खास महत्व, तुरंत दर्शन के लिए इस कूपन का उठाएं लाभ

इस साल बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी को मनाया जाएगा. इस दिन पूरे देश भर में मां सरस्वती की पूजा आराधना की जाती है.वहीं  देवघर में सरस्वती मंदिर मे मंदिर स्टेट और पुजारी परिवार के द्वारा सरस्वती मां की पूजा आराधना की जाएगी.  देवघर में बसंत पंचमी का खास महत्व होता है. खास इसलिए क्योंकि बसंत पंचमी के दिन ही शादी से पहले का रस्म यानी तिलको उत्सव मनाया जाता है. लाखों मिथिलांचल वासी बसंत पंचमी के दिन देवघर गंगाजल लेकर पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना कर उनका तिलक चढ़ाते हैं. आम दिनों की तुलना मे उस दिन काफी ज्यादा भीड़ होती है. तो इस साल क्या व्यवस्था रहेगी जानेंगे देवघर मंदिर प्रशासन से?

देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम के मंदिर प्रबंध रमेश परिहस्त ने लोकल 18 से कहा कि बसंत पंचमी के दिन बाबा का तिलक चढ़ता है. उस दिन लाखों मिथिलावासी बाबा भोलेनाथ का तिलक चढ़ाते हैं. मिथिलावासी अपने साथ गंगाजल, धान की बाली, शुद्ध गाय के घी और अबीर गुलाल साथ लाते हैं. बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग के पर अर्पण करते हैं. उस दिन ज्यादा भीड़ होने के कारण व्यवस्था भी दुरुस्त रखना पड़ता है. इसके लिए मंदिर के चारों ओर अभी से ही बैरिकेडिंग किया जा रहा है. वहीं, बसंत पंचमी के दिन सवा लाख से ज्यादा श्रद्धालु जलार्पण करने का उम्मीद है.

इस फूल के सेवन से मात्र 24 दिनों में बढ़ेगा वजन
बसंत पंचमी के दिन यह रहेगी व्यवस्थाएं
ज्यादा भीड़ को देखते हुए बसंत पंचमी के दिन वीआईपी सेवा बंद कर दी जाती है और सूत्र बताते है कि इस साल भी वीआईपी सेवा बंद रहने वाली है. शीघ्रदर्शनम कूपन के माध्यम से श्रद्धालु पूजा अर्चना कर सकते हैं. हालांकि, बसंत पंचमी के दिन शीघ्र दर्शनम कूपन का दाम अन्य दिनों के तुलना में दोगुना होता है. यानी उस दिन आपको शीघ्रदर्शनम कूपन के लिए 500 रुपए की कीमत चुकानी होगी.

बसंत पंचमी के दिन होती है पारंपरिक पूजा:
बसंत पंचमी के दिन मिथिलावासी बाबा पर जल अर्पण के साथ अभी गुलाल भी अर्पण करते हैं और एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर इस तिलकोउत्सव को मनाते है. इसके साथ ही बसंत पंचमी के दिन रात्रि में लक्ष्मी नारायण मंदिर में तिलक पूजा की जाती है जिसमें आम के नए मंजर कई तरह के भोग, अबीर गुलाल, शुद्ध घी आदि चीज अर्पण होती हैं. इसके बाद गर्भगृह में जाकर भगवान शिव के शिवलिंग के ऊपर में भी यह सब चीज अर्पण होती है.वही तब से लेकर फागुन मास की पूर्णिमा तक रोज शिवलिंग के ऊपर अबीर ग़ुलाल अर्पण किया जाता है.
 

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *