ट्रंप अब देखेंगे कैसी होती है ‘डेड इकॉनमी’… GST 2.0 से मोदी ने कैसे साधे एक तीर से कई निशाने?

नई दिल्‍ली: दिग्‍गजों ने जीएसटी काउंसिल के सुधारों की जमकर तारीफ की है। नए सुधारों से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ये सुधार मांग को बढ़ाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने के लिए एकदम सही पॉलिसी है। मोदी सरकार ने इसके जरिये एक तीर से कई निशाने साधे हैं। जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हवाला देकर कहा कि भारत अब दिखाएगा कि ‘डेड इकॉनमी’ कैसी दिखती है। ट्रंप ने भारत को डेड इकॉनमी बताया था। जीएसटी काउंसिल ने अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं। इसके बाद वेम्बु और कोटक AMC के एमडी नीलेश शाह जैसे कई दिग्‍गजों ने इस फैसले का स्वागत किया है। इन सुधारों से आम आदमी को फायदा होगा। साथ ही अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा, ‘घरेलू मांग को बढ़ाने के लिए टैक्स में कटौती और घरेलू उत्पादन में निवेश को प्रोत्साहित करना बिल्कुल सही तरीका है। इससे घरेलू मांग बढ़ेगी। रोजगार पैदा होंगे। हमारी सरकार ने हमेशा समझदारी से काम लिया है। इसलिए हम ऐसा कर सकते हैं। हम उन्हें दिखाएंगे कि ‘डेड इकॉनमी’ कैसी दिखती है।’ वेम्बु को विश्वास है कि भारत के सुधार इकनॉमिक ग्रोथ को रफ्तार देंगे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में बीते रोज जीएसटी काउंसिल ने अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बड़े बदलाव को मंजूरी दी थी। इसके बाद कई एक्‍सपर्ट्स ने अपनी राय जाहिर की है। 22 सितंबर से जीएसटी 5% और 18% के दो स्लैब में काम करेगा। लग्जरी और सिन गुड्स पर 40% का विशेष शुल्क लगेगा। इस फैसले से मौजूदा 12% और 28% के स्लैब खत्म हो जाएंगे। लगभग सभी दैनिक उपयोग, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा की जरूरी चीजों पर दरों में कटौती होगी।
पहले पर्सनल हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर 18% टैक्स लगता था। इसे अब पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने इस कदम को ‘आम आदमी पर केंद्रित’ सुधार बताया है। उन्होंने कहा, ‘श्रम प्रधान उद्योग, किसान और स्वास्थ्य क्षेत्र को इससे फायदा होगा।’

एक तीर से कई निशाने

वेम्बु अकेले नहीं हैं, जिन्होंने इस फैसले का स्वागत किया। कोटक AMC के एमडी नीलेश शाह ने भी इस सुधार को ‘एक तीर कई निशाने’ बताया है। शाह ने कहा कि जीएसटी स्लैब का इंटीग्रेशन और दरों का रेशनलाइजेशन महंगाई को कम करेगा। ग्रोथ को बढ़ाएगा। कंजयूमर सेंटिमेंट्स को सुधारेगा। इसके अलावा फाइनेंशियल इंक्‍लूजन को बाधित नहीं करेगा। कारोबार करने में आसानी को बढ़ाएगा। अमेरिका के अनुचित टैरिफ के प्रतिकूल प्रभावों को आंशिक रूप से कम करेगा।

शाह ने कहा, ‘जीएसटी का रेशनलाइजेशन आने वाले समय में अमेरिकी टैरिफ के प्रतिकूल प्रभाव को आंशिक रूप से कम करने में मदद करेगा। कारण है कि इससे खपत बढ़ेगी।’ उन्होंने आम सहमति की रफ्तार पर भी रोशनी डाली। वह बोले, ‘दो दिनों की जीएसटी परिषद की बैठक को एक दिन में पूरा करना दिखाता है कि कितनी जल्दी काम हो रहा है।’

शाह ने फैसले का स्वागत करते हुए यह भी कहा कि जीएसटी के तहत होने वाले लीकेज और धोखाधड़ी से सख्ती से निपटना होगा। उन्होंने बचत के ‘गलत आवंटन’ को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि बचत को जोखिम भरे सट्टे और पोंजी योजनाओं में लगाने से ‘जीएसटी गिफ्ट से चार-पांच गुना ज्यादा नुकसान होता है।’

पीएम मोदी ने न‍िभाया वादा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस सुधार का वादा किया था। यह ऐसे समय पर आया है जब भारत के निर्यात पर अमेरिका से 50% तक का भारी टैरिफ लग रहा है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि जीएसटी 2.0 से जीडीपी की ग्रोथ में 0.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे अमेरिका के टैरिफ के झटके को कम करने में मदद मिलेगी।

शैम्पू और साबुन से लेकर टेलीविजन, एसी, ट्रैक्टर और सीमेंट तक सभी चीजों पर दरों में कमी की गई है। इस सुधार से अर्थव्यवस्था में खपत बढ़ने की उम्मीद है, जहां निजी खर्च जीडीपी का 60% से ज्‍यादा है।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *