पियक्‍कड़ों से ज्‍यादा सुट्टेबाजों से खौफ… ये कैसा गणित जो बदल देता है पूरा कैलकुलेशन? प्रीमियम से समझ‍िए

नई दिल्‍ली: बीमा कंपनियां स्‍मोकिंग को लेकर जितना सख्त होती हैं, उतना शराब पीने को लेकर नहीं दिखता है। अक्‍सर वे शराब पीने को लेकर ज्‍यादा हंगामा नहीं करती हैं। यह सवाल कई लोगों के मन में आता है। असल में, बीमा की दुनिया में स्‍मोकिंग एक पक्का जोखिम है। वहीं, शराब का असर अनिश्चित होता है। यही वजह है कि टर्म इंश्योरेंस लेते समय सिगरेट पीने की आदत प्रीमियम को आसमान पर पहुंचा देती है। लेकिन, कभी-कभार शराब पीने से प्रीमियम में कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

बीमा कंपनियां जब किसी से पूछती हैं कि क्या वह स्‍मोकिंग करता है तो जवाब ‘हां’ आते ही प्रीमियम बहुत बढ़ जाता है। वहीं, अगर कोई कहता है कि वह कभी-कभी शराब पीता है तो बीमा कंपनी ज्यादा परेशान नहीं होती हैं। प्रीमियम में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन, स्‍मोकिंग की तरह कोई बड़ी पूछताछ या प्रीमियम में भारी उछाल नहीं आता।

स्‍मोक‍िंंग को साफ खतरा मानती हैं कंपन‍ियां

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बीमा अंडरराइटर (बीमा का जोखिम तय करने वाले विशेषज्ञ) के लिए स्‍मोकिंग एक ऐसी आदत है जिसके खतरे बिल्कुल साफ और तयशुदा हैं। कई शोध बताते हैं कि स्‍मोकिंग करने वालों को कैंसर, स्ट्रोक, दिल की बीमारी और डॉक्टर की ओर से बताई जाने वाली लगभग हर स्वास्थ्य समस्या का खतरा बहुत ज्यादा होता है। यह खतरा अनुमानित, लगातार बना रहने वाला और आंकड़ों से साबित है।बीमा उद्योग पूरी तरह से संभावनाओं पर आधारित है। यह इस बात का कैलकुलेशन करता है कि किसी व्यक्ति से किसी खास साल में क्लेम आने की कितनी संभावना है। चूंकि बीमा कंपनियों को पता है कि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति से क्लेम आने की संभावना बहुत अधिक होती है, इसलिए वे जोखिम का अनुमान कॉन्फिडेंस से लगा पाती हैं।

शराब पीने को लेकर नरम नजर‍िया क्‍यों?

शायद आप सोच रहे होंगे कि शराब पीने के भी तो अपने खतरे हैं। आप बिल्कुल सही हैं। अगर आप जिम्मेदारी से शराब पीते हैं तो इसका नुकसान धूम्रपान जितना तुरंत या गंभीर नहीं होता, खासकर दिल के लिए। असली परेशानी तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा या लगातार शराब पीता है। इसलिए, बीमा कंपनियां सिर्फ इसलिए प्रीमियम नहीं बढ़ातीं कि कोई व्यक्ति कभी-कभार ड्रिंक करता है। प्रीमियम तभी बढ़ता है जब मेडिकल रिपोर्ट बताती है कि शराब पीने की आदत ने स्वास्थ्य पर असर डालना शुरू कर दिया है।

हालांकि, धूम्रपान के मामले में ऐसी जांच-पड़ताल की जरूरत नहीं पड़ती। अगर आप धूम्रपान करते हैं तो बीमा कंपनी को आपके जोखिम का अंदाजा पहले से ही होता है। इसके आंकड़े इतने पुख्ता हैं कि प्रीमियम में बढ़ोतरी अपने आप तय हो जाती है।

ऐसे में अगली बार जब आप टर्म इंश्योरेंस का कोटेशन देखें और सिगरेट पीने की बात बताने पर प्रीमियम बढ़ जाए, लेकिन शराब पीने की बात बताने पर शांत रहे तो याद रखें- धूम्रपान एक निश्चित जोखिम है। शराब एक अनिश्चित जोखिम है।

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