शरद पवार की राय जो हो, अदानी घोटाले की जांच जेपीसी से ही होनी चाहिए- नाना पटोले

मुंबई। अदानी उद्योग समूह में शेल कंपनियों के माध्यम से 20,000 करोड़ रुपए कहां से आए है, और यह किसका पैसा है? देश की जनता को यह जानने का अधिकार है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मामले पर केंद्र की मोदी सरकार से जवाब मांगते हुए पूरे मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय जांच समिति (जेपीसी) के गठन की मांग की है। कांग्रेस पार्टी सहित देश के विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस पर सहमति दिखाई है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा है कि राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की इस मामले में जो भी राय हो, इसके बावजूद अदानी घोटाले की सच्चाई का पता लगाने के लिए जेपीसी जांच होनी चाहिए। इस संबंध में बोलते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि जेपीसी में हालांकि सत्ता पक्ष के सदस्यों की संख्या अधिक होती है, लेकिन बाकी पार्टी के सभी सदस्य भी इस समिति में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि अदानी घोटाले की सही स्थिति सामने लाने के लिए जेपीसी जांच जरूरी है। यूपीए सरकार के दौरान कोयला घोटाले के आरोपों के बाद कोर्ट कमेटी का गठन किया गया था लेकिन विपक्ष की मांग पर एक संयुक्त संसदीय समिति का भी गठन किया गया था। अदानी घोटाले पर भले ही शरद पवार की राय अलग है, लेकिन कांग्रेस जेपीसी जांच को लेकर अडिग है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटोले ने कहा कि एलआईसी, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और पीऍफ़ का पैसा मोदी सरकार द्वारा अदानी समूह में अवैध रूप से निवेश करने के लिए मजबूर किया गया है । हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में अदानी समूह में हुए भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया गया है । सवाल यह है कि क्या अब अदानी की कंपनी में आम जनता का पैसा सुरक्षित है? पटोले ने पूछा है कि अदानी घोटाले के गंभीर सवाल पर आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्यों चुप्पी साध रखी है। वे इस बारे बात क्यों नहीं कर रहे हैं। अगर घोटाला नहीं हुआ तो फिर मोदी सरकार को घबराने की क्या जरूरत है?

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