कौन है इमरान ख्वाजा? जिसने पाकिस्तान से की डील, बचाया टी20 वर्ल्ड कप में भारत-पाक मैच

नई दिल्ली: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाकिस्तान मैच पर मंडरा रहे संकट के बीच इमरान ख्वाजा का नाम एक बार फिर संकटमोचक के रूप में उभरा है। जब क्रिकेट की राजनीति चरम पर होती है और आईसीसी को एक ऐसे मध्यस्थ की जरूरत होती है जो बिना किसी शोर-शराबे के मसलों को सुलझा सके, तब सिंगापुर के इस अनुभवी प्रशासक की भूमिका अहम हो जाती है।

पर्दे के पीछे ख्वाजा का रोल काफी अहम

सिंगापुर क्रिकेट एसोसिएशन के प्रतिनिधि और आईसीसी के डिप्टी चेयर इमरान ख्वाजा को क्रिकेट जगत में एक निष्पक्ष आवाज माना जाता है। 64 वर्षीय ख्वाजा पेशे से वकील हैं और 2008 से आईसीसी के आंतरिक कामकाज का हिस्सा रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि उन्हें भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों के साथ-साथ एसोसिएट देशों का भी विश्वास हासिल है। इस समय उनका मिशन स्पष्ट है कि पाकिस्तान सरकार और पीसीबी के साथ बैक-चैनल बातचीत के जरिए 15 फरवरी के मुकाबले को बचाना।

सत्ता के गलियारों में गहरा अनुभव

ख्वाजा केवल एक मध्यस्थ नहीं हैं, बल्कि वे आईसीसी के आधुनिक संविधान के मुख्य वास्तुकारों में से एक हैं। 2017 से डिप्टी चेयर के पद पर काबिज ख्वाजा ने शशांक मनोहर के कार्यकाल के दौरान छोटे देशों को बोर्ड में मजबूत आवाज दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 2020 में शशांक मनोहर के इस्तीफे के बाद, उन्होंने अंतरिम अध्यक्ष के रूप में महामारी के कठिन दौर में आईसीसी का मार्गदर्शन किया था।

जय शाह के साथ अनुभव का संतुलन

हाल ही में कोलंबो में हुई आईसीसी की एजीएम में ख्वाजा को फिर से एसोसिएट सदस्य निदेशक के रूप में चुना गया है। वर्तमान में वे जय शाह के साथ आईसीसी के डिप्टी चेयर के रूप में काम कर रहे हैं। जहां एक ओर जय शाह का नेतृत्व और विजन है, वहीं दूसरी ओर ख्वाजा का दशकों पुराना कूटनीतिक अनुभव है। पाकिस्तान के बहिष्कार वाले रुख को नरम करने के लिए आईसीसी ने इसी अनुभव पर भरोसा जताया है।

क्यों अहम है ख्वाजा की भूमिका?

भारत-पाकिस्तान मुकाबला केवल एक मैच नहीं, बल्कि आईसीसी के रेवेन्यू और टूर्नामेंट की सफलता की रीढ़ है। यदि भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह मैच रद्द होता है, तो ब्रॉडकास्टर्स और प्रायोजकों को करोड़ों का नुकसान होगा। ऐसे में ख्वाजा का धैर्य और उनकी मध्यस्थता ही वह आखिरी उम्मीद है, जो क्रिकेट को राजनीति से ऊपर रख सकती है।

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