क्यों लगाई जाती है देवी-देवता की परिक्रमा? जानें क्या हैं इसके फायदे, कैसे और कितनी करें प्रदक्षिणा

सनातन धर्म में पूजा-पाठ के बाद और पूजा-पाठ के दौरान कई सारे नियमों का पालन किया जाता है. इन्हीं में से एक है पूजा-पाठ के बाद देवी-देवताओं की परिक्रमा करना. परिक्रमा के बाद भगवान का आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है. मंदिर में परिक्रमा हो या फिर भगवान के सामने एक स्थान पर घूमकर की गई परिक्रमा हो. हिंदू धर्म में भगवान की परिक्रमा का काफी महत्व बताया गया है. इनका धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही महत्व है. इसके बारे में हमें बता रहे हैं दिल्ली निवासी ज्योतिष आचार्य पंडित आलोक पाण्ड्या. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों भगवान की परिक्रमा लगाई जाती है?

भगवान गणेश और कार्तिकेय ने लगाई थी परिक्रिमा
प्रचलित कहानी के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने पुत्रों गणेश और कार्तिकेय को पूरी सृष्टि का चक्कर लगाने और सबसे पहले आने वाले को विजेता घोषित करने की एक प्रतियोगिता रखी. इस प्रतियोगिता में भगवान गणेश भगवान शंकर और माता पार्वती के चारों तरफ तीन बार घूम गए और उन्होंने ये प्रतियोगिता जीत ली. इसी के आधार पर सारी सृष्टि के लोग भगवान को ही माता-पिता मानकर उनकी परिक्रमा करते हैं. तभी से परिक्रमा की शुरुआत हुई.

सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार
सनातन धर्म में परिक्रमा लगाना बेहद शुभ माना गया है. मान्यता है कि जो भगवान की परिक्रमा लगाता है , उसे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और जब वह व्यक्ति घर जाता है तो घर में फैली नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है. इसलिए भगवान की परिक्रमा करना फायदेमंद माना जाता है.

घर में आती है सुख-समृद्धि
धार्मिक मान्यता के अनुसार परिक्रमा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कमी नहीं होती. इससे जीवन में खुशियां आती हैं.

इस तरह लगाएं परिक्रिमा
1. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार परिक्रमा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में लगानी चाहिए. यानी भगवान के दाएं हाथ से बाएं हाथ की तरफ परिक्रमा लगाना शुभ माना जाता है.
2. हमेशा परिक्रमा विषम संख्या में लगाई जाती है, जैसे 1, 3, 5, 7 या 9.
3. परिक्रमा करते समय बात नहीं करना चाहिए.
4. परिक्रमा करते समय भगवान का ध्यान करना सर्वोत्तम माना जाता है.

क्या है वैज्ञानिक दृष्टिकोण?
परिक्रमा लगाना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. जिस जगह पर प्रतिदिन पूजा होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार बढ़ जाता है और जब यह ऊर्जा इंसान के शरीर में प्रवेश करती है तो उस व्यक्ति का आत्मबल मजबूत होता है और उसको मानसिक शांति मिलती है.
 

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