‘राष्ट्रीय गीत का अपमान क्यों?’ इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम पर रार, मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और जीतू पटवारी से मांगा जवाब

भोपाल। इंदौर नगर निगम में बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस पार्षदों द्वारा वंदे मातरम का अपमान अब तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने सदन में धर्म का हवाला देते हुए राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को गाने से मना कर दिया था, अन्य सदस्यों ने इसका विरोध किया लेकिन कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पर कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

अब इस मुद्दे पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इस पर पूरी प्रदेश कांग्रेस को इस्तीफा दे देना चाहिए। कांग्रेस अपने दोहरे चरित्र से बाहर नहीं निकल पा रही। उन्होंने कहा कि इंदौर नगर निगम की महिला पार्षदों ने बेशर्मी की हद पार कर दी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि कांग्रेस की पार्षद ने नगर निगम में वंदे मातरम गाने से इनकार किया और बड़ी बेशर्मी के साथ कहा कि मैं नहीं गाऊंगी। यह कांग्रेस का चरित्र बता रहा है। कांग्रेस पार्षद भारत माता की जय बोलने से भी मना करते हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पर स्पष्टीकरण दें। वे बताएं कि पार्टी इस तरह के लोगों को प्रोत्साहित क्यों करती है।

चुप क्यों है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ये लोग देश को कहां ले जाएंगे, देशभक्तों का अपमान करेंगे। हजारों देशभक्तों ने भारत माता की जय बोलते-बोलते प्राण त्याग दिए। मुझे इस बात का बड़ा दुख और मुझे इस मामले पर ग्लानि हो रही है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी जो हर मामले पर बोलते हैं, वो अब इस पर क्यों नहीं बोल रहे। कांग्रेस की पार्षद की टिप्पणी पर उनका क्या कहना है। अगर इस पर पटवारी और कांग्रेस नेता कोई कार्रवाई नहीं कर पाते, तो सभी को इस्तीफा दे देना चाहिए।

कांग्रेस का दोहरा चरित्र

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जब देखो तब कांग्रेसी भगवान राम की निंदा करते हैं, हिंदुओं का अपमान करते हैं। अब तो इन्होंने सीमा ही पार कर दी है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वंदे मातरम के 6 छंदों को लेकर पूरे देश का दिल जीत चुके हैं। लेकिन, कांग्रेस अपने दोहरे चरित्र से बाहर नहीं आ पा रही। कांग्रेस ने आजादी के पहले से वंदे मातरम पर बखेड़ा खड़ा किया। उनकी सरकार ने 5 छंदों को ही गायब कर दिया था।

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