‘मिनी इंडिया’ क्यों कहा जाता है इजरायल का परमाणु शहर डिमोना? भारत की चाट, जलेबी और क्रिकेट का है दीवाना

तेल अवीव: इजरायल का डिमोना शहर के लिए शनिवार की रात बेहद खौफनाक रही, जब ईरान की मिसाइलों के हमले से यह इलाका थर्रा उठा। रविवार सुबह जब डिमोना के लोग बाहर निकले तो चारों तरफ भयावह नजारा था। ईरानी मिसाइल हमले ने शहर के एक हिस्से को मलबे के ढेर में बदल दिया था, जो पिछली रात की तबाही की गवाही दे रहा था। ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई उसके नतांज परमाणु सुविधा पर हमले के जवाब में की गई। डिमोना इजरायल के परमाणु ठिकाने से महज 13 किलोमीटर की दूरी पर है और यही इस पर हमले की वजह बना।

इजरायल का मिनी इंडिया डिमोना

हालांकि, डिमोना इजरायल का प्रमुख परमाणु केंद्र है, लेकिन इसकी एक और पहचान है जो भारत से जुड़ी है। डिमोना को इजरायल में मिनी इंडिया का खिताब हासिल है। इस शहर में लगभग 7500 लोगों का एक मजबूत भारतीय-यहूदी समुदाय रहता है, जो शहर की कुल आबादी का लगभग 30 फीसदी है।

डिमोना के लोग आज भी भारतीय संस्कृति और भारत में अपनी जड़ों से खुद को जोड़े हुए हैं। यहां सड़कों पर लोगों को फर्रादेदार मराठी बोलते हुए सुना जा सकता है, तो कुछ लोग थोड़ी-बहुत हिंदी भी बोलते हैं। वैसे तो इजरायल में क्रिकेट प्रमुख खेल नहीं है, लेकिन डिमोना में क्रिकेट के दीवानों की अच्छी संख्या है। यहां की दुकानों में सोनपापड़ी, गुलाम जामुन, पापड़ी चाट और भेलपुरी जैसे भारतीय नाश्ते देखकर आप हैरान हो सकते हैं।
भारतीय कैसे पहुंचे इजरायल?

  • 1948 में इजरायल राज्य के गठन के बाद दुनिया भर से यहूदी यहां आने लगे। भारत के इजरायल में प्रवासन की मुख्य लहर 1950 और 1960 के दशक में आई थी।
  • इनमें से ज्यादातर लोग महाराष्ट्र से आए हैं, जिन्हें बनी इजरायल कहा जाता है। कुछ छोटे समूह केरल (कोच्चि यहूदी) और कोलकाता (बगदाद यहूदी) से भी आए। हाल के कुछ वर्षों में मिजोरम और मणिपुर से भी यहूदी डिमोना में बस गए हैं।
  • इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई, जब यहूदी एजेंसी ने मुंबई के फोर्ट इलाके में अपना दफ्तर खोला। यह एजेंसी यहूदियों को इजरायल जाकर बसने के लिए प्रोत्साहित करती थी।
  • 1956 तक पश्चिमी भारत से लगभग 2000 यहूदी इजरायल चले गए। इन्होंने इजरायल के दक्षिणी शहर डिमोना को अपना घर बना लिया।

भारतीय जड़ों से आज भी जुड़े

डिमोना में रहने वाले भारतीय यहूदी आज ज्यादातर हीरे के व्यापारी, आईटी प्रोफेशनल और बुजुर्गों की देखभाल करने वाले के तौर पर काम करते हैं। आज भी यहां लोग भाषा, त्योहार और दूसरी परंपराओं के जरिए भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हुए हैं। दीवाली और ओणम जैसे त्योहार के जीवन का एक अहम हिस्सा बने हुए हैं।

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