गुरुग्राम को जापानियों का इंतजार क्यों? क्लब से लेकर होटल और अपार्टमेंट तक जापानी थीम पर

नई दिल्ली: गुरुग्राम को जापानियों का बड़ी बेसब्री से इंतजार है। दरअसल, गुरुग्राम के प्रॉपर्टी डेवलपर्स अब जापानी खरीदारों पर खास ध्यान दे रहे हैं। वे इस सेगमेंट में बढ़ती मांग को भुनाना चाहते हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत में जापानी मल्टीनेशनल कंपनियों की संख्या बढ़ रही है।

रिटेल, रियल एस्टेट और शिपिंग जैसी कंपनियां अब गुरुग्राम को अपना पसंदीदा ठिकाना बना रही हैं। ये कंपनियां उन ऑटोमोबाइल निर्माताओं के साथ जुड़ रही हैं जो पहले से ही यहां मौजूद हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार जापानी लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए गुरुग्राम में कई तरह के प्रोजेक्ट्स शुरू किए जा रहे हैं। इनमें जापान-केंद्रित क्लब, खास बुटीक होटल और सर्विस अपार्टमेंट शामिल हैं। ये सब जापानी समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं।

जापानी लोगों की बढ़ रही संख्या

सेंट्रल पार्क के सेल्स प्रेसिडेंट अंकुश कौल कहते हैं कि गुरुग्राम धीरे-धीरे जापानी पेशेवरों के लिए भारत के सबसे पसंदीदा हब में से एक बन गया है। इसकी वजह यहां बड़ी जापानी कंपनियों की मौजूदगी, अच्छी सामाजिक सुविधाएं और एक ऐसा माहौल है जो उन्हें अपनेपन का एहसास कराता है।

वे आगे कहते हैं कि जैसे-जैसे यह समुदाय बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ऐसे घरों की जरूरत भी बढ़ रही है जो उनकी सांस्कृतिक मान्यताओं का सम्मान करें और साथ ही उन्हें आराम, शांति और सटीकता प्रदान करें जिसकी वे अपने रोजमर्रा के जीवन में कद्र करते हैं। सेंट्रल पार्क का गुरुग्राम स्थित प्रोजेक्ट खास तौर पर जापानी जीवनशैली पर केंद्रित है। इसमें जापानी निवासियों के लिए एक अलग क्लब भी बनाया गया है।

छोटे फ्लैट में भी दिलचस्पी

बिल्डर्स का कहना है कि जापानी खरीदारों की मजबूत मांग के कारण अब छोटे फ्लैट्स, जैसे स्टूडियो और 1BHK यूनिट्स में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। पहले इन यूनिट्स को निवेश के तौर पर ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। अब इन छोटे घरों की मांग और कीमत दोनों बढ़ रही हैं, क्योंकि ये विदेशी पेशेवरों की पसंद के हिसाब से हैं।

किराए की कीमत भी बढ़ी

आहूजा रेजिडेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ जयदीप आहूजा बताते हैं कि डेवलपर्स अब जापान से प्रेरित लिविंग स्पेस बना रहे हैं। इनकी खास अपील के कारण इनकी कीमत भी ज्यादा होती है। वे आगे कहते हैं कि जापानी मांग के रुझान का असर अब कई इलाकों में किराए की कीमतों पर भी पड़ रहा है। किराए के दाम ऊंचे बने हुए हैं। हालांकि इसके विपरीत प्रीमियम प्रोजेक्ट्स में किराए के दाम तब कम हुए जब वे इन किरायेदारों की कीमत की संवेदनशीलता से ऊपर चले गए। इससे पता चलता है कि यह समुदाय सोच-समझकर पैसे खर्च करता है।

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