400 से ज्यादा गाड़ियों का करेगी संचालन:एंबुलेंस चलाने वाली कंपनी को डायल-112 इमरजेंसी का ठेका

रायपुर, छत्तीसगढ़ में इमरजेंसी सर्विस डायल-112 की 400 से ज्यादा गाड़ियों का संचालन अब जीवीके को मिलने वाला है। पुलिस मुख्यालय की कमेटी ने जीवीके ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज का टेंडर फाइनल कर दिया है। इसकी दरें और अन्य शर्तें बाकी कंपनियों से कम पाई गईं। कंपनी को ठेका देने के लिए फाइल शासन को भेज दी गई है।

15 दिन के भीतर शासन से मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद जीवीके इमरजेंसी व्हीकल्स का संचालन करेगी। कंपनी को यह ठेका 5 साल के लिए दिया जाएगा। पहली बार डायल-112 के साथ नेशनल हाइवे पर चलने वाली हाइवे पेट्रोलिंग की 60 गाड़ियों के लिए संयुक्त टेंडर निकाला गया था।

दोनों का संचालन अब जीवीके करेगी। हालांकि जीवीके को अब तक सिर्फ एंबुलेंस संचालन का अनुभव है। पहली बार पुलिस संबंधित इमरजेंसी गाड़ियों के संचालन का ​का जिम्मा कंपनी को मिला है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अक्टूबर को डायल-112 और हाइवे पेट्रोलिंग की गाड़ियां चलाने के लिए टेंडर जारी किया गया था। इसमें 7 कंपनियां शामिल हुई थीं। इनमें से जीवीके ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज और डेनेब एंड पोलक्स टूर एंड ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड को शॉर्टलिस्ट किया गया था। बाद में जीवीके का टेंडर फाइनल किया गया।

अधिकांश कंपनियों को डायल-112 का अनुभव नहीं डायल-112 और हाइवे पेट्रोलिंग के लिए अक्टूबर में निकाले गए टेंडर निकाला गया। इसमें जीवीके ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज, डेनेब एंड पोलक्स टूर्स एंड ट्रेवल्स प्रा.लि., सम्मान फाउंडेशन, कम्युनिटी एक्शन थ्रू मोटिवेशन प्रोग्राम (कैम्प), विजन प्लस, जय अंबे प्रा. लि. और एबीपी कंपनी शामिल हुई।

इनमें एबीपी फिलहाल डायल-112 का संचालन कर रही है। टेंडर में शामिल ज्यादातर कंपनियों को डायल-112 और हाइवे पेट्रोलिंग जैसी पुलिस संबंधी इमरजेंसी सेवाओं के संचालन का अनुभव नहीं है। अधिकांश कंपनियां हेल्थ सेक्टर में काम कर चुकी हैं। हालांकि पुलिस मुख्यालय ने टेंडर की शर्तों में अनुभव को अनिवार्य नहीं किया था।

टेंडर ओपन कैटेगरी में जारी किया गया था, जिसमें ट्रांसपोर्टिंग का अनुभव रखने वाली कंपनियों को भी शामिल होने की अनुमति थी। इसी कारण टूर एंड ट्रेवल्स और ट्रक परिवहन करने वाली कंपनियां भी इस टेंडर में शामिल हुईं। जीवीके और टूर एंड ट्रेवल्स कंपनी को पुलिस से संबंधित गाड़ियों के संचालन का अनुभव नहीं है।

टेंडर में नियमों का पालन भी नहीं सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) का नियम है कि पहली बार जब कोई टेंडर जारी किया जाए, तो प्रतिस्पर्धी बोली, नीलामी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कम से कम तीन योग्य कंपनियां पात्र होनी चाहिए। तभी टेंडर प्रक्रिया पूरी मानी जाती है। लेकिन पीएचक्यू की कमेटी ने सिर्फ दो कंपनियों में ही टेंडर फाइनल कर दिया।

3 माह पहले खरीदी गई थीं गाड़ियां 33 जिलों में डायल-112 की सेवा शुरू करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने तीन माह पहले 400 नई गाड़ियां खरीदी थीं। ये 2024-25 मॉडल की गाड़ियां फिलहाल अमलेश्वर बटालियन में खड़ी हैं। एक गाड़ी की कीमत लगभग 15 लाख रुपए है। टेंडर के बाद दिसंबर से ये गाड़ियां सड़कों पर दौड़ेंगी। इसके संचालन के लिए कंपनी को 1590 ड्राइवरों की जरूरत होगी, जो तीन शिफ्टों में काम करेंगे।

  • जीवीके ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज ने 460 गाड़ियां चलाने के लिए 310 करोड़ रुपए की दर दी।
  • डेनेब एंड पोलक्स टूर्स एंड ट्रेवल्स प्रा. लि. ने 460 गाड़ियों के लिए 342 करोड़ की दर दी।
  • अन्य कंपनियों की दरें भी इसी के आसपास थीं, लेकिन वे नियमों के आधार पर शॉर्टलिस्ट नहीं हो सकीं।

टेंडर को फाइनल करने पीएचक्यू में बनी कमेटी टेंडर फाइनल करने के लिए पुलिस मुख्यालय में कमेटी बनाई ​थी। इसमें एडीजी प्रदीप गुप्ता, आईजी ओपी पाल, अंकित गर्ग, रामगोपाल गर्ग, डीआईजी मनीष शर्मा, एएसपी अविनाश ठाकुर और एसके झा शामिल थे।

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