योगी सरकार प्रदेश में टीबी के प्रीजेम्टिव केसों की बढ़ाएगी जांच

लखनऊ । योगी सरकार प्रदेश को वर्ष 2025 तक ट्यूबरक्लोसिस मुक्त बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके लिए अलग-अलग तरीके से टीबी के मरीजों को खोजने का काम और उनका इलाज किया जा रहा है। इसी क्रम में योगी सरकार ने अब प्रीजेम्टिव (अनुमानित) केसों की ज्यादा से ज्यादा जांच कराने का फैसला किया है। स्टेट टीबी अफसर डॉ. शैलेंद्र भटनागर ने इस संबंध में सभी जिला क्षय रोग अधिकारियों को पत्र जारी किया है। पत्र में निर्देश दिया गया है कि सभी जिले प्रीजेम्टिव टीबी के केसों की जांच बढ़ाएं। पत्र के मुताबिक इस साल प्रीजेम्टिव टीबी इक्जामिनेशन रेट 2000 प्रति लाख जनसंख्या प्रति वर्ष होना चाहिए। ज्यादातर जिले इस लक्ष्य को अभी तक प्राप्त नहीं कर सके हैं इसलिए साल के बचे कार्यदिवसों में लक्ष्य को प्राप्त करें। 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हालांकि टीबी मरीज खोजने के मामले में भारत की तारीफ की है। डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2023 के मुताबिक वर्ष 2022 में टीबी से होने वाली मौतें भी घटी हैं। इस दौरान दुनिया के 27 फीसदी टीबी मरीज भारत में पाए गए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि देश-प्रदेश में टीबी मरीजों को चिंहिकरण का काम तेज हुआ है। नेशनल स्ट्रेटजिक प्लान 2017-2025 के मुताबिक, टीबी उन्मूलन का लक्ष्य 44 केस प्रति लाख निर्धारित किया गया है। ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2023 के मुताबिक देश में बीते साल 199 केस प्रति लाख मिले हैं जिसे 2023 में 77 प्रति लाख होने की उम्मीद है। एसटीओ ने हाई रिस्क वाले क्षेत्रों में एक्टिव केस फाइंडिंग कैम्पेन कराने, क्षय रोगियों के संपर्क में रहने वाले समस्त व्यक्तियों की जांच कराने, गैर संचारी रोग क्लीनिक, आरबीएसके-आरकेएसके की स्क्रीनिंग कराने के लिए जांच कराने और समस्त स्वास्थ्य सुविधाओं में रेफरल की नियमित मानीटरिंग के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निक्षय दिवस और मुख्यमंत्री आरोग्य मेले के दौरान अधिक से अधिक संभावित क्षय रोगियों की जांच कराने को भी लिखा है।

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