युजवेंद्र चहल का आखिरकार छलका दर्द, बताया परिवार के लिए क्यों बुरा महसूस करते हैं वो
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल स्पिनरों में से एक युजवेंद्र चहल अक्सर मैदान के बाहर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में रहते हैं। वह अपने रिश्तों को लेकर सोशल मीडिया पर फैंस के बीच काफी मशहूर हैं। अब चहल ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में होने के नाते वह ध्यान आकर्षित करने के आदी हो चुके हैं, लेकिन जब यह चर्चा दूसरों को बिना वजह घसीटने लगती है, तो उन्हें आपत्ति होती है।
अफवाहों का परिवार पर असर
चहल ने स्वीकार किया कि वह खुद तो अफवाहों के प्रति मोटी खाल विकसित कर चुके हैं, लेकिन उनके माता-पिता और बहनों पर इसका गहरा भावनात्मक प्रभाव पड़ता है। चहल ने कहा कि ‘मैं खुद को ढाल सकता हूं, मुझे परवाह नहीं है। लेकिन मेरे साथ मेरी बहनें और माता-पिता भी हैं। वे ये सब चीजें पढ़ते हैं। आप कितनी चीजों को चुप कराएंगे? अगर मैं सबके खिलाफ बोलना शुरू करूं, तो मैं ऐसा कर सकता हूं, लेकिन आप कितने लोगों को रोकेंगे?’
चहल ने दिया बड़ा बयान
चहल ने इस बात पर हैरानी जताई कि कैसे एक साधारण मुलाकात को भी अफेयर का नाम दे दिया जाता है। मुंबई के अपने एक हालिया दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वह सिर्फ डिनर के लिए बाहर गए थे, लेकिन उसे सोशल मीडिया पर बड़ा मुद्दा बना दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरी नहीं कि अगर कोई लड़का और लड़की साथ दिखें, तो उनके बीच कुछ चल रहा हो; वे सिर्फ अच्छे दोस्त भी हो सकते हैं।
सोशल मीडिया पर फैन वॉर
भारतीय क्रिकेट फैंस के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए चहल ने कहा कि देश में एक समस्या यह है कि लोग अपने पसंदीदा खिलाड़ी का समर्थन करने के लिए दूसरे खिलाड़ी की बुराई करने लगते हैं। उन्होंने फैंस से अपील की कि तुलना करने के बजाय पहले अपनी टीम का समर्थन करें। चहल ने कहा कि ‘यह भारतीय टीम है, कोई राज्य की टीम नहीं। भारत के लिए एक मैच खेलना भी सम्मान की बात है। उस स्तर तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ा संघर्ष है।’ सोशल मीडिया पर मिलने वाली गालियों और आलोचनाओं पर चहल ने कहा कि गुमनामी इसका सबसे बड़ा कारण है। कोई भी फर्जी अकाउंट बनाकर किसी के बारे में कुछ भी लिख सकता है। ऐसे में हर किसी को जवाब देना संभव नहीं है। इसलिए, उन्होंने शोर-शराबे को नजरअंदाज करने का फैसला किया है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, ‘जिसे जो छापना है छापने दो, मुझे तो मुफ्त में पब्लिसिटी मिल रही है।’
मजबूत इरादों के साथ आगे बढ़ रहे चहल
तमाम विवादों और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूरी के बावजूद चहल अपने व्यक्तित्व को लेकर आश्वस्त हैं। उनका मानना है कि जब तक उनका परिवार और दोस्त उन्हें जानते हैं, उन्हें बाहरी दुनिया के दावों से कोई फर्क नहीं पड़ता। चहल का यह रुख आधुनिक दौर के एथलीटों के लिए एक मिसाल है कि कैसे मानसिक शांति बनाए रखने के लिए नकारात्मकता से दूरी बनाना जरूरी है।
