प्रदेश के कई जिलों में नहीं हो रहा गेहूं का आवंटन, केंद्रीय कृषि मंत्री रहे अनभिज्ञ

बालाघाट ।  मध्यप्रदेश के बालाघाट सहित कई जिलों में सात माह से अधिक समय से गेहूं का आवंटन नहीं किया जा रहा है। जिससे जरुरतमंदों की थाली से गेहूं नदारत हो गया है। जिसके संबंध में बालाघाट प्रवास पर पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से जानकारी लेने पर पहले तो इस बात से अनिभिज्ञता जताते नजर आए, लेकिन बाद में उन्होंने बात को संभालते हुए कहा कि जिन जिलों में चावल का उत्पादन अधिक होता है वहां के लोग चावल अधिक खाते है। जिसके चलते ही उन जिलों में गेहूं के बजाय चावल का आवंटन किया जा रहा है। वहीं अब मोटा अनाज के आवंटन की प्रक्रिया को भी अपनाया जाएगा।

40 रुपये अधिक किलो तक बिक रहा आटा

बालाघाट जिले में गेहूं का आवंटन बंद किए जाने के बाद से ही एक रुपये किलो के दाम से जरुरतमंदों को मिलने वाले गेंहू के दाम 35 रुपये या उससे अधिक पहुंच गए है। वहीं आटा भी 40 रुपये से अधिक के दाम पर बिक रहा है। जिससे जरुरतमंद गेहूं न तो खरीद पा रहे है और न ही उनकी थाली में रोटी आ पा रही है। वहीं बालाघाट पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री चावल उत्पादन की बात कहकर बंद की गई आवंटन की प्रक्रिया से बचते नजर आए।

डिजीटल एग्रीकल्चर मिशन बनेंगे भारत का आधार

स्थानीय सर्किट हाउस में वार्ता के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसी भी फसल के अधिक उत्पादन पर उसके दाम कम जाने के सवाल पर कहा कि एक जिले के किसान को पूरे देश का बाजार नहीं मिल पाने के चलते इस तरह की समस्या उत्पन्न होती है। कारण एक वर्ष किसान को किसी फसल का अच्छा दाम मिल जाने पर वह और अन्य किसान भी उसी फसल का उत्पादन करते है। जिससे ये समस्या उत्पन्न हो रही है। इस तरह की समस्या से किसान को बचाने व आवश्यकता अनुसार ही फसल को उत्पादन हो इसके लिए डिजीटल एग्रीकल्चर मिशन को आधार बनाया है। इस मिशन के तहत सेटेलाइट से सर्वे का कार्य किया जाएगा। जिससे किस जिले या किस राज्य में कितनी खेती है कौनसा किसान कौन सी फसल का उत्पादन कर रहा है। इन सब की जानकारी इस मिशन के तहत मिल जाएगी और यह कार्य इसी माह से शुरु किया जा सकेगा।

शिकायतों का भी होगा समाधान

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अब तक ओलावृष्टि समेत अन्य समस्याओं पर पटवारियों के द्वारा सर्वे का कार्य करने पर कई बार इस तरह की शिकायत सामने आती है कि सर्वे का कार्य सही तरीके से नहीं किया गया है। डिजीटल एग्रीकल्चर मिशन से इस समस्या का समाधान भी हो जाएगा। पूरे देश की कृषि का रिकार्ड सरकार के पास इस मिशन के तहत होने पर किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा आने पर सेटेलाइट के माध्यम से ही सर्वे कराया जाएगा व मुआवजा दिया जाएगा।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *