क्या हुआ जब प्रभु श्रीराम की पतंग पहुंच गई इद्रलोक

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के पर्व को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है इस दिन पूजा पाठ, स्नान दान और जाप का बहुत महत्व होता है मकर संक्रांति का त्योहार केवल दान पुण्य के लिए नहीं बल्कि पतंग उड़ाने के लिए भी जाना जाता है इस दिन पतंग उड़ाने की विशेष परंपरा होती है

इस दिन लोग ​दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ जमकर पतंगबाजी करते है मगर बहुत कम ही लोग यह जानते होंगे की मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का संबंध प्रभु श्रीराम से जुड़ा है धार्मिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा की शुरुआत प्रभु श्रीराम ने की थी, तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा बता रहे है तो आइए जानते है।

तमिल रामायण के अनुसार प्रभु श्रीराम ने कर संक्रांति के शुभ दिन पर पतंग उड़ाने की परंपरा का शुभारंभ किया था। कहा जाता है कि जब श्री राम ने पतंग उड़ाई थी तो वह सीधे स्वर्ग लोक पहुंच गई थी। स्वर्ग लोक में पतंग इंद्र देव के पुत्र जयंत की पत्नी को मिली। उनको पतंग बेहद पसंद आई और उस पतंग को उन्होंने अपने पास रख लिया उधर श्रीराम ने हनुमान जी को पतंग लाने के लिए भेजा। जब श्रीराम भक्त हनुमान ने जयंत की पत्नी से पतंग वापस मांगी तब उन्होंने श्रीराम के दर्शन की इच्छा जताई और कहा कि दर्शन के बाद ही वह पतंग वापस करेंगी।

उनकी इच्छा जानने के बाद श्रीराम ने कहा कि वह मेरे दर्शन चित्रकूट में कर सकती है हनुमान जी स्वर्ग लोक में जयंत की पत्नी को ​राम का आदेश दिया। जिसके बाद जयंत की पत्नी ने प्रभु राम की पतंग वापस की और तभी से मकर संक्रांति के दिन पतंग डड़ाने की परंपरा चली आ रही है इस पावन दिन पर स्नान दान, पूजा पाठ के अलावा पतंग उड़ाने से घर की दरिद्रता दूर हो जाती है और कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है।
 

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