‘सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराए जाएं लोकसभा चुनाव’, टीएमसी नेता की मांग; भाजपा ने किया पलटवार

कोलकाता ।   टीएमसी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में लोकसभा चुनाव कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थानों को तबाह करने की कोशिश कर रही है। डेरेक ओ ब्रायन ने चुनाव आयोग को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। डेरेक ओ ब्रायन ने मंगलवार को आरोप लगाते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट किया। इस पोस्ट में डेरेक ओ ब्रायन ने लिखा कि 'भाजपा घटिया तरीकों से भारत में संस्थानों जैसे चुनाव आयोग को तबाह कर रही है। क्या भाजपा लोगों को सामना करने से डर रही है और इसी वजह से उन्होंने विपक्ष को निशाना बनाने के लिए चुनाव आयोग को अपने पार्टी कार्यालय में तब्दील कर लिया है।'

डीजीपी राजीव कुमार के तबादले से भड़की टीएमसी

डेरेक ओ ब्रायन ने लिखा कि 'निर्वाचित राज्य सरकारों के अधिकारियों का ट्रांसफर किया जा रहा है। हम निष्पक्ष और मुक्त मतदान के लिए चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट लोकसभा चुनाव 2024 की निगरानी करे।' गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सोमवार को अपने एक आदेश में पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार समेत कई राज्यों को गृह सचिवों का तबादला कर दिया है। चुनाव आयोग ने विवेक सहाय को नया डीजीपी बनाया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा संवैधानिक निकायों को नियंत्रित करना चाहती है। 

भाजपा का पलटवार

डेरेक ओ ब्रायन की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आम चुनाव कराने की मांग पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि 'डेरेक ओ ब्रायन और उनकी पार्टी के नेता नया संविधान बनाना चाहते हैं। चुनाव आयोग के पास देश में चुनाव कराने की जिम्मेदारी है। यह राज्य के निर्वाचन आयोग की तरह काम नहीं करेगा, जो वो सब करे, जो ममता बनर्जी उनसे कहेंगी।'

उल्लेखनयी है कि चुनाव आयोग ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के डीजीपी समेत छह राज्यों को गृह सचिवों को हटा दिया। जिन राज्यों को गृह सचिव हटाए गए हैं, उनमें गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। साथ ही आयोग ने बीएमसी के कमिश्नर और मिजोरम के एक आईएएस अधिकारी को भी हटाने का आदेश दिया है। बीएमसी ने एक दिन पहले ही चुनाव आयोग से बीएमसी कमिश्नर को तबादले से छूट देने की अपील की थी, लेकिन चुनाव आयोग ने यह अपील खारिज कर दी। हटाए गए अधिकारियों के पास संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री कार्यालय में दोहरे प्रभार थे। 

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