मां भगवती भैंसा से करेंगी प्रस्थान, बन रहा दशमी सोम योग, हो सकता है शोक कारक

वर्ष में दो नवरात्र ऐसा होता है जो काफी धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें से एक चैती नवरात्रा भी है. जो इस वर्ष चैती नवरात्रा 30 मार्च 2025 को प्रारंभ होगी. आंगल्य तिथि के आधार पर और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से सनातनियों का नव वर्ष भी प्रारंभ होता है. जो आज के दिन से ही नए साल की शुरुआत होगी  2082 विक्रम संवत में प्रवेश करेंगे. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से सनातनियों का नव वर्ष प्रारंभ होता है जो 2082 विक्रम संवत में प्रवेश करेंगे.

इस पर विस्तृत जानकारी देते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा बताते हैं कि चैती नवरात्र दिनांक 30 मार्च 2025 से प्रारंभ होगी. आंगल्य तिथि के आधार पर . सनातन धर्म में अनादि काल से विक्रम संवत चला रहा है उसी दिन से विक्रम संवत् प्रारंभ होगा. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हम सनातनियों का नव वर्ष प्रारंभ होता है जो हम लोग 2082 विक्रम संवत में प्रवेश करेंगे. एवं यह वसंतीय नवरात्र उसी दिन से प्रारंभ होती है. हाथी पर भगवती का आगमन होगा.

हाथी पर आने का जो फलाफल है उसमें वृष्टि कारक योग
यह रविवार प्रतिपदा होने के कारण रविवार को भगवती का आगमन होने के कारण हाथी पर भगवती का आगमन होगा. हाथी पर आने का जो फलाफल है उसमें वृष्टि कारक योग बनता है. वहीं गमन दशमी सोम होने के कारण भैंस पर करेगी जो शोक कारक है.

खासकर के इसमें गज पूजा 3 अप्रैल को होगा, पत्रिका प्रवेश 4 अप्रैल को होगा, महरात्रि निशा पूजा 5 अप्रैल को होगा और उसी दिन महा अष्टमी व्रत भी है. 6 अप्रैल को महानवमी व्रत है, 7 अप्रैल को अपराजिता पूजा है उसी दिन भगवती का विसर्जन होगा और जयंती धारण करेंगे और व्रत का पारण भी करेंगे. इस नवरात्र में आदि जगदंबा की पूजा खोर्चों उपचार से करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी.

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *