Railway का सेफ्टी मिशन: भोपाल कोच फैक्ट्री ने 30 दिन में चमकाए 96 कोच, अब झटकों से मिलेगा छुटकारा

भोपाल। भारतीय रेलवे ने यात्री सुरक्षा और आरामदायक सफर की दिशा में अपने ‘सेफ्टी मिशन’ को नई गति दी है। पश्चिम मध्य रेल के भोपाल स्थित ‘सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना (कोच फैक्ट्री)’ ने नए वित्तीय वर्ष (2026-27) के पहले ही महीने में एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है।

कारखाने ने अकेले अप्रैल माह में 96 रेल कोचों का हाईटेक पीरियोडिक ओवरहालिंग (POH) कार्य पूरा कर उन्हें पटरियों पर उतारने के लिए तैयार कर दिया है।

इस हाईटेक मरम्मत से न केवल यात्रियों का सफर सुरक्षित और आरामदायक होगा, बल्कि ट्रेनों के तकनीकी खराबी के कारण निरस्त होने या देरी से चलने की संभावना भी कम हो जाएगी।

हाईटेक ओवरहालिंग: अब सफर में नहीं लगेंगे झटके

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों की सुरक्षा और स्थिरता को विश्वस्तरीय बनाना है। पीरियोडिक ओवरहालिंग (POH) के तहत उन कोचों की पूरी तरह से कायाकल्प की जाती है, जो अपनी निर्धारित दूरी या समय सीमा पूरी कर चुके होते हैं।

मरम्मत के दौरान इन तकनीकी पहलुओं पर रहा फोकस:

ब्रेकिंग सिस्टम: एयर ब्रेक सिस्टम की गहराई से जांच की गई है, जिससे ट्रेनों की स्टॉपिंग पावर मजबूत हुई है।

स्थिरता और कम्फर्ट: बोगी और ट्रॉली के महत्वपूर्ण हिस्सों की मरम्मत की गई है। इससे यात्रियों को सफर के दौरान महसूस होने वाले झटके और कंपन (Vibration) से राहत मिलेगी।

सुरक्षा कवच: कोच की बाहरी बॉडी, व्हील, एक्सल और बफर जैसे सुरक्षा उपकरणों की बारीकी से जांच कर खराब हिस्सों को बदला गया है।

यात्रियों और रेलवे दोनों को डबल फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर की गई इस सर्जरी से पुराने कोचों की उम्र बढ़ जाती है, जिससे रेलवे को नए कोच खरीदने पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च की बचत होती है। साथ ही, यह दुर्घटनाओं को रोकने में एक प्रभावी कदम साबित हो रहा है।

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