जनसुनवाई में SDM को ऊंची आवाज पसंद नहीं, बुजुर्ग को 5 घंटे थाने में रखा भूखा-प्यासा 

नीमच: एमपी में हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में परेशान आवेदकों की नई-नई व्यथा सामने आती है. जहां कभी अपनी सुनवाई करवाने के लिए आवेदक लोटन यात्रा करते हैं तो कभी आवेदनों की माला गले में पहनकर रेंगते हुए जनसुनवाई में पहुंच जाते हैं. यहां आम लोगों की समस्याओं की सुनवाई करने बैठे अधिकारी किस तरह लोगों से पेश आते हैं, इसका ताजा उदाहरण नीमच जिले में देखने को मिला. 6 महीने से सीमांकन और बटांकन के आदेश का पालन नहीं होने की समस्या लेकर एक बुजुर्ग मंगलवार को जनसुनवाई में नीमच कलेक्ट्रेट पहुंचे थे. यहां उनकी समस्या का समाधान करने की जगह उन्हें भूखा प्यासा 5 घंटे तक थाने में बैठा दिया.

समास्या समाधान की जगह भिजवा दिया थाने
नीमच कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई में एक बुजुर्ग ने अपनी समस्या को लेकर ऊंची आवाज में बात क्या कर दी उसे इसकी सजा के रूप में 5 घंटे तक थाने में बैठाया गया. बुजुर्ग की माने तो उसे इस दौरान पानी भी नहीं दिया गया. सीमांकन और बटांकन के काम में देरी के चलते बुजुर्ग ने नाराजगी व्यक्त की और ऊंची आवाज में अपनी समस्या एसडीएम को बताई. एसडीएम साहब को यह बात इतनी नागवार गुजरी की बुजुर्ग व्यक्ति को कैंट पुलिस थाने में बिठवा दिया. करीब 5 घंटे तक भूखा प्यासा रखने के बाद शाम 6 बजे बुजुर्ग को थाने से छोड़ा गया. 70 वर्षीय बुजुर्ग के साथ हुए इस व्यवहार के बाद नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने मामले की जांच करवाने के बात कही है.

सीमांकन के लिए बुजुर्ग 6 महीने से काट रहा चक्कर
70 वर्षीय जगदीश दास बैरागी अपनी पीड़ा लेकर एसडीएम संजीव साहू के सामने पहुंचे थे. बार-बार कलेक्‍टर कार्यालय के चक्‍कर लगाकर तंग आ चुके बुजुर्ग को ऊंची आवाज में अपनी पीड़ा सुनाना महंगा पड़ गया. बुजुर्ग जगदीश दास बैरागी का आरोप है कि "6 महीने से उनका सीमांकन और बटांकन का काम अटका पड़ा है. 6 महीने से ही अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं. जब गुस्सा आया तो एसडीएम के सामने अपनी बात रखी थी लेकिन उन्होंने कैंट थाने से पुलिस बुलवाकर थाने भिजवा दिया. यहां शाम 6 बजे तक बैठाकर रखा गया. आरोप है कि करीब 5 घंटे की इस यातना में बुजुर्ग को पीने का पानी तक भी नहीं दिया गया."

'एसडीएम को ऊंची आवाज पसंद नहीं'
थाने से लौटकर बुजुर्ग जगदीश दास बैरागी ने अपनी आप बीती मीडिया के सामने बताई. उन्होंने बताया कि "वह सुबह अपने गांव अड़मालिया से भूखे प्यासे निकले थे. बस पकड़ने के लिए करीब 10 किलोमीटर पैदल चले इसके बाद उन्हें देवली से बस मिली और कलेक्टर कार्यालय पहुंचे. समस्या का समाधान नहीं मिलने पर उन्हें गुस्सा आ गया और उन्होंने ऊंची आवाज में अधिकारियों से कहा कि 6 महीने से मेरा काम रोक कर रखा हुआ है. जिससे नाराज एसडीएम साहब ने मुझे पुलिस के हवाले कर दिया. थाने में मुझे पानी भी नहीं दिया गया."

'मामले की ली जा रही जानकारी'
इस मामले में जब नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि "यह मामला मेरे संज्ञान में आया है. दोनों पक्षों से इस बारे में जानकारी ली जाएगी और जांच कर उचित निराकरण किया जाएगा.
 

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