अभाविप का 77वां स्थापना दिवस:डॉ. कैलाश राव ने बताया भारतीय संस्कृति का वैज्ञानिक महत्व, युवाओं ने लिया राष्ट्रहित के लिए कार्य करने का प्रण

राजधानी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस और संगठन के 77वें स्थापना दिवस पर अभाविप की ध्येय-यात्रा कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें भोपाल के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अभाविप की वैचारिक धारा, राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान और वर्तमान पीढ़ी को सामाजिक-सांस्कृतिक जिम्मेदारियों से जोड़ना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसपीए भोपाल के निदेशक डॉ. कैलाश राव, अभाविप की राष्ट्रीय मंत्री कुमारी शालिनी वर्मा, महानगर अध्यक्ष शशिकांत पांडे और महानगर सहमंत्री आरती ठाकुर उपस्थित रहे।

हमारी संस्कृति में हर कला है विज्ञान मुख्य अतिथि डॉ. कैलाश राव ने कहा, हमारी संस्कृति में हर कला विज्ञान है, इसलिए उसे शास्त्र कहा गया है। भारतीय पुरातत्त्व विलोपन द्वारा सृजन की परंपरा पर आधारित है, यानी जो आवश्यक नहीं है, उसे हटाकर सुंदर और विज्ञान-सम्मत रचना की जाती है।

उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणों ने हमें मानसिक रूप से गुलाम बनाने के लिए ऐसी थ्योरी गढ़ीं, जिनसे हमारी संस्कृति, भाषा और दर्शन को हीन साबित किया जा सके। एएसआई’ जैसी संस्थाओं का मूल उद्देश्य भारत को समझना नहीं, बल्कि उसे वर्गीकृत कर शोषित करना था। डॉ. राव ने जोर दिया कि अगर हम 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं, तो हमें भारतीय परंपरा और जीवन दृष्टिकोण के अनुसार विकास को परिभाषित करना होगा।

अभाविप एक विचारधारा की 77 वर्षीय राष्ट्र-यात्रा अभाविप की राष्ट्रीय मंत्री कुमारी शालिनी वर्मा ने कहा कि अभाविप की 77 वर्षों की राष्ट्रवादी यात्रा को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अभाविप केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा है जो राष्ट्रीयता, सेवा, नेतृत्व और संस्कृति के मूलमंत्र पर कार्य करती है।

युवाओं को पांच विषयों पर कार्य करने के लिए कहा:

  • पर्यावरण संरक्षण
  • स्वावलंबन आधारित जीवनशैली
  • कुटुंब प्रबोधन और परिवार का सम्मान
  • नागरिक कर्तव्यों का पालन
  • सामाजिक समरसता और जातिविहीन समाज का निर्माण
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