भारत के पड़ोस में पहुंचे रूसी युद्धपोत और पनडुब्बी, ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच क्या करने जा रहे हैं पुतिन? जानें
जकार्ता: रूसी नौसेना के पैसिफिक फ्लीट के जहाजों का दस्ता इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के तंजुंग प्रियोक बंदरगाह पहुंचा है। यह दस्ता इंडोनेशियाई नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास के लिए रविवार को आया है। रूसी जहाजों के इस दस्ते में ग्रोम्की-335 कार्वेट, पेट्रोपावलोव्स्क कामचत्स्की B-274 पनडुब्बी और आंद्रेई स्टेपानोव टगबोट शामिल हैं। रूस के भारत के पड़ोस हिंद महासागर में आने ने दुनिया का ध्यान खींचा है। यह इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका इस समय ईरान में युद्ध में उलझा हुआ है। वहीं रूस ने क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की है।
एक्सपर्ट के कहना है कि रूस के जहाजों को इंडोनेशिया आने को आधिकारिक तौर पर युद्धाभ्यास और संचार पर एक संयुक्त अभ्यास के रूप में पेश किया गया है। हालांकि इसका अर्थ इससे ज्यादा है। इस बेड़े के आने का समय और संरचना यह सुनिश्चित करती है कि इसके क्षेत्रीय रणनीति के लिए व्यापक अर्थ निकलते हैं।
रूस के लिए महत्व
डिफेंस सिक्योरिटी एशिया के मुताबिक, जकार्ता में रूसी प्रशांत बेड़े की एक टुकड़ी आना क्षेत्र में नया रणनीतिक अर्थ जोड़ता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह रूस की युद्धक संपत्तियों को इंडो-पैसिफिक के सबसे अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील समुद्री क्षेत्र के भीतर स्थापित करता है।तंजुंग प्रियोक में एक कार्वेट, एक पनडुब्बी और एक बेड़ा सहायता पोत लाकर रूस केवल औपचारिक नौसैनिक पहुंच ही नहीं बना रहा है। वह स्पष्ट रूप से यह प्रदर्शित कर रहा है कि दक्षिण पूर्व एशिया तक पहुंचने वाली एक तैनात करने योग्य समुद्री उपस्थिति उसके पास अभी भी मौजूद है।
रूस के दस्ते की ताकत
जकार्ता में रूसी पनडुब्बी की मौजूदगी पर क्षेत्रीय नौसेनाओं और बाहरी ताकतों की नजर पड़ना तय है। यह रणनीति के लिहाज से सीमित है लेकिन कूटनीतिक तौर पर अहम है। हर बंदरगाह दौरा, क्रू का आदान-प्रदान और संचार अभ्यास, समुद्री प्रभाव, रक्षा स्वायत्तता और क्षेत्रीय गठजोड़ को लेकर चल रही होड़ के बीच हुआ है।
रूस ने दिखाई ताकत
रूस सिर्फ कॉर्वेट भेजता तो उसकी मौजूदगी प्रतीकात्मक लगती लेकिन पनडुब्बी के शामिल होने से यह दौरा परिचालन पहुंच, टिके रहने की क्षमता और अपने घरेलू जलक्षेत्र से दूर समुद्री साख बनाए रखने के रूस के इरादे का गंभीर प्रदर्शन बनता है। बेड़े में टगबोट का शामिल होना दिखाता है कि यह सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं है।
इंडोनेशिया के लिए अहमियत
इंडोनेशिया के लिए रूसी पनडुब्बी की जकार्ता में उपस्थिति से परिदृश्य बदलता है। पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की पनडुब्बी की उपस्थिति इस यात्रा को सबसे अधिक रणनीतिक बढ़त प्रदान करती है क्योंकि पनडुब्बियों का महत्व और निवारक क्षमता उनकी संख्या से अधिक होती है। खासतौर से जब वे शांति काल में कूटनीतिक आवरण के तहत विदेशी बंदरगाहों पर दिखाई देती हैं।
