छत्तीसगढ़ सरकार ने छह फिजियोथेरेपी कॉलेजों को दी मंजूरी, मध्य प्रदेश में घोषणा के आगे नहीं बढ़े कदम

 भोपाल। प्रदेश सरकार सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य लेकर चल रही है। साथ ही नर्सिंग कालेज भी खोले जा रहे हैं, लेकिन फिजियोथैरेपी कॉलेज खोलने में सरकार की रुचि नहीं है। साढ़े आठ करोड़ से अधिक लोगों की आबादी वाले राज्य में मात्र तीन शासकीय फिजियोथैरेपी कालेज संचालित हो रहे हैं।

उधर, पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ ने एक साथ छह कॉलेज शुरू करने की स्वीकृति दे दी है। अन्य राज्यों की स्थिति भी अच्छी है। नेशनल मेडिकल कमीशन के मापदंड के अनुसार अस्पतालों में 20 रोगियों पर एक फिजियोथैरेपिस्ट होना चाहिए, पर इसका पालन भी नहीं हो रहा है। उधर, फिजियोथैरेपी की आवश्यकता बढ़ने के कारण निजी कॉलेज तेजी से खुल रहे हैं, पर यहां शुल्क भी शासकीय कॉलेजों से अधिक है।

MP में फिजियोथैरेपी के सिर्फ तीन सरकारी कॉलेज

दूसरा, शासकीय कॉलेजों में रोगी और संसाधन अधिक होने के कारण क्लीनिकल सीखने के अच्छे अवसर हैं। बता दें कि प्रदेश में 19 शासकीय कॉलेज हैं, जिनमें इंदौर, जबलपुर और शहडोल में ही फिजियोथैरेपी का स्नातक पाठ्यक्रम (बीपीटी) संचालित हो रहा है।

तीन साल से कोई प्रोग्रेस नहीं

स्नातकोत्तर (एमपीटी) मात्र जबलपुर और इंदौर में ही है। तीनों कॉलेज में मिलाकर बीपीटी की 200 सीटें हैं। वर्ष 2023 में तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने घोषणा की थी कि सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों में फिजयोथैरेपी के स्नातक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे, तब से लगभग तीन वर्ष हो गए हैं, पर कोई प्रगति नहीं हुई है।विधानसभा में भी दिसंबर 2024 में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा था कि इस तरह की घोषणा हुई है। मेडिकल कॉलेजों में पाठ्यक्रम शुरू करने से रोगियों की बड़ा लाभ होगा। जूडा की तरह ओपीडी से लेकर वार्ड तक के लिए फिजियोथैरेपिस्ट मिल जाएंगे। बता दें कि हड़्डी, तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों में लगभग सभी रोगियों के लिए फिजियोथैरेपी कराने के लिए डॉक्टर कहते हैं। बाकी विभागों में भी इनकी जरूरत है।

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