मां को क्रिकेट के बारे में कुछ भी नहीं पता, लेकिन बेटे ने IPL में मचा दिया बवाल, श्रेयस अय्यर की पंजाब किंग्स को चटाई धूल

नई दिल्ली: IPL 2026 में पंजाब किंग्स का सामना दिल्ली कैपिटल्स से हुआ। दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा था। पंजाब किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए प्रियांश आर्या (56) और कप्तान श्रेयस अय्यर (नाबाद 59) की शानदार पारियों के दम पर 210/5 का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में दिल्ली की शुरुआत खराब रही और एक समय स्कोर 74/4 था। यहां से अक्षर पटेल और डेविड मिलर ने पारी को संभाला, लेकिन मैच का असली फिनिशिंग टच युवा माधव तिवारी और आशुतोष शर्मा ने दिया। माधव ने न केवल गेंद से 2 विकेट लिए, बल्कि दबाव के क्षणों में बेखौफ बल्लेबाजी कर टीम को 19 ओवर में ही लक्ष्य तक पहुंचा दिया।

माधव तिवारी का सफर

मैच के बाद मुस्कुराते हुए माधव ने बताया कि उन्हें बचपन से ही बल्लेबाजी करना पसंद था, जबकि गेंदबाजी उन्हें थका देने वाला काम लगता था। इंदौर में पले-बढ़े माधव को पूर्व भारतीय क्रिकेटर अमेय खुरासिया ने एक संपूर्ण ऑलराउंडर के रूप में तैयार किया। माधव ने कहा, ‘मेरे कोच जानते थे कि एक ऑलराउंडर होने के क्या फायदे हैं। जब मुझे इसकी अहमियत समझ आई, तो मैंने दोनों विभागों में बराबर मेहनत शुरू कर दी।’

नई दिल्ली: IPL 2026 में पंजाब किंग्स का सामना दिल्ली कैपिटल्स से हुआ। दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा था। पंजाब किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए प्रियांश आर्या (56) और कप्तान श्रेयस अय्यर (नाबाद 59) की शानदार पारियों के दम पर 210/5 का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में दिल्ली की शुरुआत खराब रही और एक समय स्कोर 74/4 था। यहां से अक्षर पटेल और डेविड मिलर ने पारी को संभाला, लेकिन मैच का असली फिनिशिंग टच युवा माधव तिवारी और आशुतोष शर्मा ने दिया। माधव ने न केवल गेंद से 2 विकेट लिए, बल्कि दबाव के क्षणों में बेखौफ बल्लेबाजी कर टीम को 19 ओवर में ही लक्ष्य तक पहुंचा दिया।

माधव तिवारी का सफर

मैच के बाद मुस्कुराते हुए माधव ने बताया कि उन्हें बचपन से ही बल्लेबाजी करना पसंद था, जबकि गेंदबाजी उन्हें थका देने वाला काम लगता था। इंदौर में पले-बढ़े माधव को पूर्व भारतीय क्रिकेटर अमेय खुरासिया ने एक संपूर्ण ऑलराउंडर के रूप में तैयार किया। माधव ने कहा, ‘मेरे कोच जानते थे कि एक ऑलराउंडर होने के क्या फायदे हैं। जब मुझे इसकी अहमियत समझ आई, तो मैंने दोनों विभागों में बराबर मेहनत शुरू कर दी।’

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