बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप विवाद में आया नया मोड़, पूर्व सरकार के भारत दौरे पर रोक की होगी जांच, कमेटी गठित

नई दिल्ली: बांग्लादेश क्रिकेट और राजनीति के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश की नई सरकार ने उस विवादास्पद फैसले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसके कारण देश की टीम को 2026 टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होना पड़ा था। तत्कालीन सरकार के भारत में मैच न खेलने के अड़ियल रुख ने बांग्लादेशी क्रिकेट प्रशंसकों को एक बड़ा जख्म दिया था, जिसे अब नई सरकार भरने की कोशिश कर रही है।

बांग्लादेश ने लिया बड़ा फैसला

बांग्लादेश के खेल मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि अतिरिक्त सचिव डॉ. ए.के.एम. वली उल्लाह की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। इस समिति में बांग्लादेश के पूर्व कप्तान और मुख्य चयनकर्ता हबीबुल बशर और फैसल दस्तगीर भी शामिल हैं। इस कमेटी को 15 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच का मुख्य केंद्र वह फैसला है जिसके कारण बांग्लादेश को वर्ल्ड कप से हाथ धोना पड़ा और उनकी जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया।

विवाद की जड़, मुस्तफिजुर रहमान और बीसीसीआई का फैसला

इस पूरे ड्रामे की शुरुआत 3 जनवरी को हुई थी, जब बीसीसीआई ने कोलकाता नाइट राइडर्स को निर्देश दिया कि वे बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को अपनी टीम से हटा दें। उस समय भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों में तनाव चल रहा था। इसके तुरंत बाद, तत्कालीन खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए आईसीसी से मांग कर दी कि बांग्लादेश के मैच भारत से हटाकर श्रीलंका स्थानांतरित किए जाएं।

सुरक्षा का बहाना और आईसीसी का कड़ा रुख

आसिफ नजरुल का तर्क था कि यदि एक बांग्लादेशी क्रिकेटर भारत में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है, तो पूरी टीम वहां कैसे खेल सकती है। हालांकि, आईसीसी ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। आईसीसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने ढाका का दौरा भी किया, लेकिन बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और सरकार अपने रुख पर अड़े रहे। नतीजतन, 24 जनवरी को आईसीसी ने बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।

नई सरकार का रुख, रिश्तों को सुधारने की कोशिश

नई सरकार के गठन के बाद खेल मंत्री अमीनुल हक ने स्पष्ट किया है कि वे भारत के साथ खेल संबंधों को फिर से सुधारना चाहते हैं। उन्होंने संसद में कहा कि टी20 वर्ल्ड कप के मामले में जिस तरह से पिछली सरकार और बीसीबी ने व्यवहार किया, उसकी गहन जांच जरूरी है। दिलचस्प बात यह है कि चुनाव से ठीक पहले आसिफ नजरुल ने अपने बयान से पलटते हुए इस पूरी घटना की जिम्मेदारी खिलाड़ियों पर डालने की कोशिश की थी।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *