ईरान से भिड़ गए थे असीम मुनीर, अमेरिका की खातिर चीन को ठेंगा द‍िखाया

इस्लामाबाद: खोजी वेबसाइट ‘ड्रॉप साइट’ ने डिप्लोमेटिक केबल को लीक करते हुए कई बड़े खुलासे किए हैं। इनमें असीम मुनीर के काम करने के तरीके, ईरान में बहस और अमेरिका के करीब जाने को लेकर कई बड़ी बातों का खुलासा किया गया है। मूल दस्तावेजों को लीक करते हुए वेबसाइट ने बताया है कि 2019 में इमरान खान की सरकार के दौरान असीम मुनीर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के प्रमुख थे और इस दौरान वो इमरान खान के साथ ईरान के दौरे पर गये थे। अप्रैल 2019 में जब मुनीर ISI के डायरेक्टर जनरल थे तो वे तत्कालीन प्रधानमंत्री खान के साथ तेहरान गए थे। वहां उन्होंने ईरानी अधिकारियों और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अधिकारियों के साथ बातचीत की थी। इमरान खान के करीबी लोगों के मुताबिक असीम मुनीर ने इस दौरान ईरानियों के साथ बलूच इलाके में लंबे समय से चल रही बगावत को लेकर तीखी बहस की थी। यह इलाका ईरान और पाकिस्तान की सीमा से बंटा हुआ है।

आपको बता दें कि ‘ड्रॉप साइट’ ने डिप्लोमेटिक केबल के हवाले से ये भी खुलासा किया है कि असीम मुनीर ने चीन को ग्वादर में स्थायी सैन्य अड्डा बनाने देने के बदले भारत के खिलाफ परमाणु मदद मांगी थी। पाकिस्तान ने चीन से अपने न्यूक्लियर ट्रायड को पूरा करने यानि पनडुब्बी से परमाणु हथियार लॉन्च करने की तकनीक मांगी थी लेकिन चीन ने यह क्षमता देने से मना कर दिया था। पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से ये क्षमता हासिल करने की फिराक में है लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली है। डिप्लोमेटिक केबल के हवाले से असीम मुनीर के आर्मी चीफ बनने की पूरी कहानी बताई गई है।

ईरानी अधिकारियों से असीम मुनीर की हुई थी बहस

ड्राप साइट ने इमरान खान की पार्टी PTI के एक पूर्व अधिकारी के हवाले से बताया है कि मुनीर ने "ईरान में गैर-कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया और उस रणनीति से हट गए जिस पर पाकिस्तानी सरकार ने इस दौरे से पहले आपस में चर्चा की थी।" यह मुनीर के काम करने के तरीके की एक खास बात है। इमरान खान के करीबी लोगों में शामिल रहे एक सूत्र ने ‘ड्रॉप साइट’ को इस बात की पुष्टि की। अगर पाकिस्तान और ईरान मिलकर बलूच इलाके में चल रही बगावत को खत्म करने के लिए काम करते, तो यह दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्तों की दिशा में एक कदम होता। साथ ही यह ईरान को अलग-थलग करने की वॉशिंगटन की कोशिशों के बिल्कुल उलट होता। लेकिन असीम मुनीर ने पाकिस्तान और ईरान को करीब आने से रोककर अमेरिका का एक बड़ा काम कर दिया।

ईरानी नेतृत्व ने इमरान खान से असीम मुनीर के गुस्से भरे बर्ताव की शिकायत की और फिर जून 2019 में इमरान खान ने असीम मुनीर को पद से हटा दिया। असीम मुनीर सिर्फ 8 महीने ही ISI के प्रमुख रह पाए। वहीं जब बाजवा ने शुरू में सेना प्रमुख के पद के लिए उत्तराधिकारियों की एक सूची पेश की थी तो उसमें मुनीर का नाम शामिल नहीं था। जिसके बाद असीम मुनीर नवाज शरीफ से मिलने लंदन चले गये और फिर इमरान खान को पद से हटाने के लिए ‘लंदन प्लान’ तैयार किया। इमरान खान को अमेरिका की मदद से सत्ता से हटाने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मुनीर को 24 नवंबर 2022 को सेना प्रमुख नियुक्त किया। और फिर बाद में असीम मुनीर ने इमरान खान को जेल भिजवा दिया।

अमेरिका और चीन के बीच कहां हैं असीम मुनीर?

असीम मुनीर के आने के बाद पाकिस्तान में चीन का निवेश लगभग रूक सा गया है। CPEC के तहत मूल रूप से सोची गई लगभग 90 परियोजनाओं में से सिर्फ 38 ही पूरी हुई हैं। तेईस अभी भी निर्माणाधीन हैं। लगभग एक-तिहाई अभी तक शुरू भी नहीं हुई हैं। चीन ने पाकिस्तान को फंड देना बंद कर दिया है जिसकी वजह असीम मुनीर हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 2024 में नई फंडिंग हासिल करने के उद्देश्य से बीजिंग की यात्रा करने के बाद खाली हाथ लौटे। चीनी बिजली उत्पादकों को पाकिस्तान का बकाया भुगतान न होना, अब दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले टकराव का एक बड़ा कारण बन गया है। इस्लामाबाद में बीजिंग के राजदूत जियांग ज़ैडोंग ने 2024 में एक सार्वजनिक सेमिनार में एक असामान्य कदम उठाते हुए पाकिस्तानी सरकार पर चीनी श्रमिकों की सुरक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया था।

दरअसल इसके पीछे की भी एक अलग कहानी है। लीक डिप्लोमेटिक केबल से पता चला है कि असीम मुनीर ने 2024 में चीन को ग्वादर में स्थायी चीनी सैन्य अड्डा बनाने का ऑफर दिया था। लेकिन उसके बदले पाकिस्तान के न्यूक्लियर ट्रायड को पूरा करने के लिए समुद्र से परमाणु बम चलाने की तकनीक मांगी। इसके अलावा सैन्य अड्डा बनाने के बदले अमेरिका की तरफ से जो प्रतिक्रिया होती उसके लिए चीन का कवर मांगा और भारत से मुकाबले के लिए लड़ाकू विमान और दूसरे एडवांस सिस्टम मांगे। लेकिन चीन ने न्यूक्लियर ट्रायड पर पाकिस्तान की मांग मानने से मना कर दिया। इसके बाद असीम मुनीर अमेरिका की तरफ मुड़ गये।

चीन को दरकिनार कर अमेरिका के करीब मुनीर

अगस्त 2025 में एक इंटरव्यू में असीम मुनीर ने एक पत्रकार से कहा "हम एक दोस्त के लिए दूसरे दोस्त की कुर्बानी नहीं देंगे।" यह बात उन्होंने वॉशिंगटन और बीजिंग के साथ पाकिस्तान के रिश्तों के संदर्भ में कही थी। हालांकि खुद को फिर से व्यवस्थित करने की कोशिश में पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व ने ठीक यही किया। CPEC का दूसरा चरण जिससे बीजिंग पर पाकिस्तान की आर्थिक निर्भरता और गहरी हो जाती उसे जान-बूझकर कमजोर पड़ने दिया गया। असीम मुनीर ने चीनी मजदूरों की सुरक्षा की चीन की मांग को चुपचाप टाल दिया। इसके तहत चीनी कर्मचारी पाकिस्तानी जमीन पर चीनी कमान के अधीन आ जाते लेकिन असीम मुनीर ने ऐसा नहीं होने दिया। इन्हीं घटनाओं ने असीम मुनीर को ट्रंप प्रशासन के करीब पहुंचा दिया और बाद में वो डोनाल्ड ट्रंप के ‘फेवरेट फील्ड मार्शल’ बन गये।

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