‘धुरंधर’ राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा? HC से मंत्रालय को जांच के निर्देश, सैन्‍यकर्मी ने दी याचिका

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड (CBFC) को निर्देश दिया है कि वो फिल्म ‘धुरंधर’ में दिखाए गए कुछ सीन्स को लेकर उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर विचार कर उचित निर्णय लें। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे ‘विचारणीय’ हैं और उन्हें ‘उचित तरीके से संबोधित’ किया जाना चाहिए।

‘धुरंधर 2’ के खिलाफ याचिका एक सैन्यकर्मी द्वारा दायर की गई थी, जो व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुआ। उसने दावा किया कि फिल्म में कुछ ऐसे सीन्स हैं, जिनमें सेना और सुरक्षा बलों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों, ऑपरेशनल तरीकों और संवेदनशील लोकेशनों को बहुत स्पष्टता के साथ दिखाया गया है, और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि भले ही फिल्म को ‘फिक्शन’ बताया गया हो, लेकिन इस तरह का चित्रण देश की सुरक्षा और अखंडता के हित में नहीं माना जा सकता। यह उसके लिए खतरा है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि फिल्मों का प्रभाव केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता। बेंच ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी फिल्म में आत्महत्या से पहले ऑनलाइन तरीके खोजने जैसे सीन्स विस्तार से दिखाए जाएं, तो यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे चित्रण ‘उद्देश्यपूर्ण’ हैं? कोर्ट ने कहा कि फिल्मों के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता और इसी कारण सेंसरशिप और दिशानिर्देशों की जरूरत पड़ती है।

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि उसने 23 मार्च 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व भी भेजा था, जिसमें फिल्म के कई सीन्स पर आपत्ति दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उसने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिका को प्रतिनिधित्व मानते हुए सक्षम प्राधिकारी पूरे मामले पर विचार करे और जरूरी लगने पर ‘सुधारात्मक कदम’ उठाए। साथ ही, लिया गया निर्णय याचिकाकर्ता को भी सूचित किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।

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