महंगा पेट्रोल-डीजल लगा रहा है महंगाई का तड़का, भोपाल में कपड़ा, बर्तन, किराना, अनाज सब महंगा

भोपाल। पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव के कारण कच्चा तेल लगातार बढ़ रहा है। इसी कारण देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को दूसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़े हैं। अब इसका असर महंगाई के रूप में सामने आ रहा है। कपड़ा, बर्तन, किराना और अनाज सब महंगा होने लगा है। ट्रांसपोर्ट भाड़ा बढ़ने से महंगाई का भार आखिरकार आम नागरिकों पर ही पड़ता नजर आ रहा है।

मंगलवार को पेट्रोल-डीजल के दाम एक बार फिर से बढ़ा दिए गए। भोपाल में अब सरकारी कंपनियों का सामान्य पेट्रोल 110.75 रुपये एवं डीजल 95.91 रुपये प्रति लीटर हो गया है। रिलायंस, एस्सार एवं नायरा जैसी निजी कंपनियों के दाम से दो से तीन रुपये अधिक हैं।

दाम बढ़ने के साथ ही ट्रांसपोर्टरों ने माल भाड़ा बढ़ा दिया है। फिलहाल करीब 10 प्रतिशत भाड़ा बढ़ा है। फ्यूल महंगा होने से केवल वाहन चलाना तो महंगा हुआ ही है इसका असर कपडा, बर्तन, परिवहन, सब्जियों, दूध, तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ने लगा है। आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि डीजल का उपयोग सबसे अधिक माल ढुलाई में होता है। ट्रक, बस, कृषि उपकरण और मालवाहक वाहन डीजल से चलते हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने पर परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर बाजार में बिकने वाले सामान पर पड़ता है। फल, सब्जियां, अनाज, दूध और किराना सामान शहरों तक पहुंचाने का खर्च बढ़ने से इनके दाम भी बढ़ रहे हैं। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर महसूस किया जा रहा है।

राहत नहीं मिली तो कारोबार घटेगा

व्यापारियों का कहना है कि माल ढुलाई महंगी होने से छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ गई है। कपड़ा, किराना, प्लास्टिक, निर्माण सामग्री और घरेलू उपयोग की वस्तुओं के दाम धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं। कुछ दुकानदारों का मानना है कि यदि ईंधन कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो बाजार में ग्राहकों की खरीद क्षमता कम होगी। कारोबार घटेगा क्योंकि रसोई का बजट लगातार बिगड़ रहा है। खाद्य तेल, दाल, सब्जी और दूध जैसी आवश्यक वस्तुएं पहले से महंगी हैं, ऐसे में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम अतिरिक्त दबाव पैदा कर रहे हैं। वहीं युवाओं और नौकरीपेशा वर्ग में भी भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

महंगाई दर बढ़ेगी, खर्च घटेगा

जानकारों के अनुसार यदि ईंधन कीमतों में तेजी बनी रही तो आने वाले महीनों में महंगाई दर और बढ़ सकती है। इसका असर त्योहारों के बाजार और उपभोक्ता खर्च पर भी दिखाई देगा। लोगों को उम्मीद है कि सरकार टैक्स में राहत या अन्य उपायों के जरिए आम जनता को कुछ राहत देने की कोशिश करेगी। ऐसा नहीं हुआ तो लोग खर्च कम करेंगे।

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