समाज के सवालों को पर्दे पर ला रहे भोपाल के युवा, शार्ट फिल्मों के जरिए जागरूकता बढ़ाने की पहल

 भोपाल। समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर युवाओं की संवेदनशीलता अब केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं है। भोपाल के युवा फिल्म निर्माण को सामाजिक संवाद का माध्यम बनाते हुए ऐसी लघु फिल्में तैयार कर रहे हैं, जो लोगों को सोचने और अपने आसपास के परिवेश को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करती हैं।

पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारियों जैसे विषय उनकी कहानियों का केंद्र बन रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद वे मोबाइल आधारित फिल्मांकन, ड्रोन कैमरों, डिजिटल संपादन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपकरणों का उपयोग कर प्रभावशाली सामग्री तैयार कर रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर सार्थक चर्चा को बढ़ावा देना है।

आभासी दुनिया और रिश्तों का अंतर

लघु फिल्मों में काम करने वाली छात्रा ऋषिता पटेल बताती हैं कि हाल में एक फिल्म में ऐसी पात्र की भूमिका निभाई है, जो दुर्घटना के बाद सामाजिक माध्यमों पर अपनी कहानी साझा कर लोगों की सहानुभूति प्राप्त करती है।

धीरे-धीरे उसे यह एहसास होता है कि आभासी लोकप्रियता और वास्तविक जीवन में मिलने वाला सहयोग दोनों अलग-अलग बातें हैं। आज लोग किसी के संघर्ष को स्क्रीन पर देखकर प्रतिक्रिया तो दे देते हैं, लेकिन वास्तविक भावनाओं और जरूरतों को समझने का प्रयास कम करते हैं।

युवाओं की सोच को समझने का प्रयास

निफ्ट भोपाल की छात्रा सुहानी ने लघु फिल्म ‘फर्क’ का निर्माण किया। सुहानी के अनुसार यह फिल्म केवल एक शैक्षणिक परियोजना नहीं थी, बल्कि आज की युवा पीढ़ी की सोच और जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण को समझने का प्रयास थी।

सोशल मीडिया के दौर में लोग अपने संघर्षों और भावनाओं को अलग-अलग तरीकों से व्यक्त करते हैं। इसी अनुभव ने उन्हें इस विषय पर काम करने की प्रेरणा दी। फिल्म यह दर्शाती है कि समान परिस्थितियों का सामना करने वाले लोग अलग-अलग रास्ते चुन सकते हैं।

संघर्ष को शक्ति में बदलने का संदेश

फिल्म में अभिनय करने वाली निफ्ट की छात्रा माहरीन वसीम का मानना है कि सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्में लोगों को जीवन की चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने हाल में एक लघु फिल्म में एक ऐसी युवती की भूमिका निभाई, जो दुर्घटना के बाद परिस्थितियों के आगे झुकने के बजाय शिक्षा, मेहनत और आत्मविश्वास के सहारे अपने जीवन को नई दिशा देती है। ये कहानियां दर्शाती हैं कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी कठिनाइयों से नहीं, बल्कि उनसे उबरने के उसके साहस से बनती है।

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