2 लाख रुपये में कौन बनेगा वैज्ञानिक?’, शेखर गुप्ता ने DRDO भर्ती की सैलरी पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: देश में एक तरफ जहां नौकरियों की कमी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो वहीं जो पोस्ट निकल रही हैं, उनकी सैलरी भी सवालों के घेरे में आ गई है। भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ( DRDO ) के एक हालिया नौकरी के विज्ञापन ने देश भर में सैलरी और टैलेंट को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। जाने-माने पत्रकार शेखर गुप्ता ने एक्स पर एक पोस्ट में DRDO के इस विज्ञापन में वैज्ञानिकों के प्रस्तावित वेतन पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद यह मुद्दा अब सुर्खियां बटोर रहा है

क्या है विज्ञापन में?

  • डीआरडीओ ने साइंटिस्ट-ई, साइंटिस्ट-डी और साइंटिस्ट-सी पोस्ट के लिए विज्ञापन निकाला है। इस विज्ञापन को डीआरडीओ ने अपने एक्स अकाउंट पर भी पोस्ट किया है।
  • इसमें लिखा है कि साइंटिस्ट-ई पोस्ट के लिए 11 साल के अनुभवी वैज्ञानिक की जरूरत है। इस पद के लिए मंथली बेसिक सैलरी 1,23,100 रुपये तय की गई है।
  • साइंटिस्ट-डी पोस्ट के लिए 78,000 रुपये और साइंटिस्ट-सी पोस्ट के लिए 67,700 रुपये बेसिक सैलरी है।

शेखर गुप्ता ने क्या उठाया सवाल?

शेखर गुप्ता ने DRDO के विज्ञापन वाली पोस्ट को शेयर करते हुए सरकारी क्षेत्र में सैलरी स्ट्रक्चर पर चिंता व्यक्त की है। गुप्ता ने अपनी पोस्ट में लिखा है, ‘जरा इन सैलरी को देखें। एक वैज्ञानिक को 11 साल के अनुभव के बाद 1,23,000 रुपये की बेसिक सैलरी मिलेगी। अगर हम DA और अन्य भत्तों को भी जोड़ दें, तो यह कुल मिलाकर 2 लाख रुपये या उससे थोड़ा ज्यादा हो सकता है। यह सच है कि सरकारी नौकरियों के सैलरी के साथ चुनौतियां हैं, लेकिन इस सैलरी से प्रतिभाशाली लोग आकर्षित नहीं होंगे।’

प्राइवेट सेक्टर में कितनी सैलरी?

  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस में 11 साल के वैज्ञानिक की सैलरी करीब 30 साल ये 40 लाख रुपये के बीच में है।
  • वहीं हथियार बनाने वाली दुनिया की टॉप कंपनियों में शामिल अमेरिका की Lockheed Martin में सालाना बेसिक सैलरी 150,000 डॉलर (करीब 1.43 करोड़ रुपये) है।

लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं

शेखर गुप्ता की इस पोस्ट पर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं रही हैं। कुछ लोगों ने गुप्ता के विचारों का समर्थन किया और कहा कि सरकारी क्षेत्र में वेतन को आधुनिक समय के अनुसार प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता है। कुछ ने तर्क दिया कि देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भर बनने के मिशन में योगदान करने का जुनून और सेवा भाव सैलरी से अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

imgroot नाम के एक यूजर ने लिखा है, ‘सर, सुरक्षित नौकरी की गारंटी ही काफी है। फिर प्रतिष्ठा आती है। फिर सुविधाएं मिलती हैं। फिर उपलब्धि हासिल करने का अवसर मिलता है। फिर सेवा करने का मौका मिलता है।’ वहीं akverma नामक यूजर ने लिखा है, ‘यह तब भी कोई नहीं आएगा सर। यहां सिविल सेवाओं की तरह भ्रष्टाचार नहीं कर पाएगा तथा रुतबा भी तो नहीं है। कितने साइंटिस्ट का नाम हम जानते हैं, ज्ञान की साधना करने वालों की मनोरंजन करने वालों की तुलना में तो कोई इज्जत ही नहीं है।’

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