राजेश खन्ना को जिन्होंने गोद लिया था, राजकुमार की तरह पाला, मामा के सवाल पर छलके थे 12 साल के जतिन के आंसू

राजेश खन्ना को बचपन में ही उनके अंकल आंटी ने गोद ले लिया था। बचपन में लोग उन्हें जतिन खन्ना के नाम से जानते थे। ये बात कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें उनके चाचा-चाची ने गोद ले लिया था। इसके पीछे भी एक इमोशनल कहानी है जिसके बारे में एक्टर कभी बात करना पसंद भी नहीं करते थे।

बताया जाता है कि जतिन के माता-पिता से चुन्नीलाल और लीलावती खन्ना ने उन्हें छोटी उम्र में ही उन्हें गोद ले लिया था। दरअसल, खन्ना की असली मां ने उनके जन्म से पहले ही अपने बच्चे को अपनी भाभी को सौंपने का वादा कर दिया था।

गोद लेने वाले किस्से को टाल दिया करते राजेश खन्ना

राजेश खन्ना इस फैक्ट्स के बारे में बात करने से हमेशा बचने की कोशिश करते थे। एक इंटरव्यू में राजेश खन्ना ने अपने बचपन में गोद लेने वाले किस्से को टाल दिया करते थे। खन्ना अक्सर जब भी प्रेस से बातें करते थे अपने बचपन के बारे में बात करते समय अलग-अलग किस्से सुनाया करते थे।

चुन्नीलाल खन्ना और उनकी पत्नी, निःसंतान थे

राजेश खन्ना को जिन्होंने गोद लिया था उनका नाम चुन्नीलाल और लीलावती खन्ना है जो उनके रिश्तेदार यानी चाचा-चाची थे। दरअसल एक्टर को गोद लेने के पीछे की वजह ये थी कि चुन्नीलाल खन्ना और उनकी पत्नी, निःसंतान थे। इसी वजह से राजेश खन्ना की अपनी मां ने संतान के रूप में उनका यह बच्चा सौंपने का वादा पहले ही कर दिया था।

इस दूसरी मां को चाई जी कहकर बुलाया करते थे जतिन

हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स ये भी बताते हैं कि जीवन से जुड़े इस राज ने जतिन के दिल और दिमाग पर गहरा असर डाला था। कहते हैं कि उन्हें उनकी मां लीलावती ने किसी राजकुमार की तरह पाला था और उन्हें लगने लगा था कि उनकी हर फरमाइशें पूरी होंगी। ऐसा अक्सर कहा जाता है कि बच्चों की हर फरमाइशें पूरी हों तो वे जिद्दी बन जाते हैं और राजेश खन्ना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। यहीं से उन्हें ये लगने लगा था कि चाहे घर हो या स्कूल हर कोई बस उनपर ही ध्यान दें। जतिन अपनी इस दूसरी मां को चाई जी कहकर बुलाया करते थे।

कहते- वो मेरा बस्ता उठाएंगी तभी मैं घर जाऊंगा

कुछ रिपोर्ट्स में उनके घर का हिस्सा रहे प्रशांत कुमार रॉय ने इस बारे में कुछ किस्से सुनाए थे और चाई जी की कही बातों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, ‘चाई जी अक्सर हमें जतिन के किस्से सुनाया करती थीं और वो हंसते हुए कहती थीं- ये (जतिन) तो बचपन से ही राजा जैसा है। जब स्कूल से लौटता था तो कहता था चाई जो को नीचे गेट पर बुलाओ। वो मेरा बस्ता उठाएंगी तभी मैं घर जाऊंगा।’ कहते हैं कि तब बिल्डिंग में लिफ्ट नहीं थी और चाई जी सीढ़ियां उतरकर उन्हें ले जाने नीचे आती थीं। यानी जतिन की हर जिद को पूरा करने के लिए चाई जी हमेशा तैयार रहतीं।

जतिन की जिद्द हर दिन बढ़ने लगी

और तो और, बताया जाता है कि अगर अपने मन की न हो तो वो रोना भी शुरू कर देते थे। अब बेशुमार प्यार ने उन्हें भी बिगाड़ा और जतिन की जिद्द हर दिन बढ़ने लगी। उनके बचपन से जुड़ी एक घटना ने उनपर गहरा असर डाला। बताया जाता है कि उनके परिवार के करीब रहे एक शख्स ने इस बारे में बताया था जिसके बारे में बताया था, जिसमें उन्हें मामा से डांट पड़ने की कहानी है। ये वो घटना थी जो उन्हें पूरी जिंदगी याद रह गई।

उनकी बात सुनकर 12 साल के जतिन की आंखें छलक आईं

तब जतिन केवल 12 साल के थे। उनके पिता रेलवे में गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्टर थे जो कॉटन सप्लाई का काम किया करते थे। एक रोज जतिन स्कूल से आते ही पिता के ऑफिस पहुंचे और दौड़कर पापा की कुर्सी पर जा बैठे। उसी समय उनके मामा के के तलवार आ गए और जतिन को इस कुर्सी पर बैठे देखकर उन्हें गुस्सा आ गया। उन्होंने ऊंचा आवाज में उनसे कुर्सी पर बैठने को लेकर सवाल किया। उनकी बात सुनकर वो घबरा गए और फौरन उठकर खड़े हो गए। मामा ने कहा था- पहले इस लायक बनो कि किसी दूसरे की कुर्सी पर बैठ सको। उनकी बात सुनकर जतिन की आंखें छलक आईं और उन्हें समझ नहीं आया कि उनके कहने का मतलब क्या था। फिर वो चाई जी के पास पहुंचे और जोर-जोर से रो पड़े। उन्हें बहुत बुरा लगा था। उन्होंने एक बार अपने इंटरव्यू में कहा था कि मामा की डांट से पहले उनसे कभी किसी ने इस तरह की बातें नहीं की। उन्हें अपने घर में न सुनने की आदत नहीं थी।

पिता की जद्दोजहद की कहानी जतिन ने काफी ध्यान से सुनी

एक इंटरव्यू में राजेश खन्ना ने बताया था कि घर वापस आकर मां से उन्होंने पूछा था कि डिजर्विंग का मतलब क्या होता है, ऐसा क्यों है कि एक बेटा अपने बाप की कुर्सी पर बैठ नहीं सकता? इसके बाद मां लीलावती ने उनसे जो कुछ कहा वो राजेश खन्ना यानी जतिन के दिमाग में गांठ बनकर रह गई। इसके बाद चाई जी ने उनके पिता के स्ट्रगल की पूरी कहानी सुनाई कि कैसे चुन्नीलाल ने एक चॉल में रहकर मुंबई में आगे बढ़ने के लिए संघर्ष किया था। कई साल की मेहनत के बाद वो मामूली से सुपरवाइजर के बाद रेलवे में कॉन्ट्रैक्टर बने थे। फिर चाई जी ने उनसे कहा, ‘तुम्हारे मामा ने जो तुम्हें आज लायक बनने की बात कही है, उसका मतलब ये है कि जिस तरह वो मेहनत करके उस कुर्सी तक पहुंचे, तुम्हें भी वैसी ही मेहनत करनी होगी।’ उस दौरान पिता की जद्दोजहद की कहानी जतिन ने काफी ध्यान से सुनी थी। चाई जी ने कहा था, ‘अगर अपने बुरे वक्त में भगवान को नहीं भूलते तो भगवान भी तुम्हें नहीं भूलता।’ उस दिन उन्हें ये सबक समझ आ गया कि उन्हें जिंदगी में जो कुछ चाहिए उसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

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