विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्वीकरण को बताया मौजूदा दौर की वास्तविकता

स्टॉकहोम । विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि वैश्वीकरण मौजूदा दौर की वास्तविकता है और बहुध्रुवीयता का मूल्यांकन होना चाहिए, क्योंकि बहुध्रुवीय दुनिया बहुध्रुवीय एशिया के जरिये ही संभव है। वह स्टॉकहोम में यूरोपीय संघ (ईयू) हिंद-प्रशांत मंत्री-स्तरीय मंच (ईआईपीएमएफ) को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच संबंधों को मजबूत करने समेत कई द्विपक्षीय मुद्दों पर भी अपने यूरोपीय संघ के समकक्षों के साथ बातचीत की। जयशंकर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच नियमित, व्यापक और स्पष्ट संवाद का भी आह्वान किया, जो केवल आज के संकट तक ही सीमित न हो। उन्होंने कहा ‎कि वैश्वीकरण हमारे दौर की एक वास्तविकता है। दूरदराज के क्षेत्र और देश दुनिया में कहीं भी होने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं से अछूते नहीं रह सकते। न ही हम उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकते हैं। विदेश मंत्री ने कहा ‎कि हिंद-प्रशांत खुद ही वैश्विक राजनीतिक की दिशा में तेजी से अहम होता जा रहा है। यूरोपीय संघ तथा हिंद-प्रशांत एक-दूसरे के साथ जितनी भागीदारी करेंगे, उतना ही बहुध्रुवीयता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि भारत जितनी तेजी से अपनी वैश्विक मौजूदगी का विस्तार करेगा, उतना ही वह आने वाले वर्षों में यूरोपीय संघ के साथ जुड़ेगा।
जयशंकर ने भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के क्वाड समूह को वैश्विक वृद्धि का मंच भी बताया, जो हिंद-प्रशांत के किसी भी मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा ‎कि भौगोलिक रूप से, हिंद-प्रशांत एक जटिल और भिन्न परिदृश्य है, जिसे अधिक गहन जुड़ाव के माध्यम से बेहतर रूप से समझा जा सकता है। भारत की बहुत कम सरकारों ने यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों के साथ भागीदारी में इतनी ऊर्जा लगायी है तथा प्रयास किया है, जितना मौजूदा सरकार कर रही है। इस बैठक के इतर जयशंकर ने शनिवार को फ्रांस, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, साइप्रस, लातविया, लिथुआनिया और रोमानिया के अपने समकक्षों के साथ बैठकें की थी। जयशंकर बांग्लादेश से स्वीडन पहुंचे हैं, जहां उन्होंने शुक्रवार को छठे हिंद महासागर सम्मेलन को संबोधित किया था।

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