MP में बन रहा 11 हजार करोड़ की लागत से 1,920 मेगावाट क्षमता का पंप हाइड्रो स्टोरेज प्लांट

 भोपाल। मध्य प्रदेश तेजी से ऊर्जा और टेक्सटाइल हब के रूप में उभर रहा है। एक ओर प्रदेश में 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से देश का सबसे बड़ा पंप हाइड्रो स्टोरेज प्लांट तैयार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर टेक्सटाइल सेक्टर में वर्ष 2030 तक पांच अरब अमेरिकी डॉलर निर्यात का लक्ष्य तय किया गया है।

इन दोनों परियोजनाओं से हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निवेशकों को हर संभव सुविधा देने का भरोसा दिलाया है।

गांधी सागर के पास बनेगा देश का सबसे बड़ा प्लांट

  • ग्रीनको ग्रुप के कार्यकारी निदेशक नरसिम्हा राव बंडारू और उपाध्यक्ष नवीन कुमार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर बताया कि नीमच जिले में गांधी सागर के पास 1,920 मेगावाट क्षमता का पंप हाइड्रो स्टोरेज प्लांट बनाया जा रहा है। करीब 11 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना से चार हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
  • यह परियोजना प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार प्लांट बिजली उत्पादन और ऊर्जा भंडारण दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • निवेशकों को हर सुविधा देने का भरोसा

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश निवेश के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध करा रहा है। सरकार उद्योगों को सभी आवश्यक सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

    टेक्सटाइल निर्यात बढ़ाने की तैयारी

    उधर, राज्य सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर में 2030 तक पांच अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य तय किया है। इसे लेकर एमपीआईडीसी भोपाल में राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में उद्योग, निर्यात और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए।

11 जिलों पर रहेगा फोकस

  • सरकार ने सीहोर, रायसेन, धार, इंदौर, खरगोन, उज्जैन और भोपाल को चैंपियन जिले तथा जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और बुरहानपुर को आकांक्षी जिले के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।
  • धार के पीएम मित्र पार्क में 38 कंपनियों ने 21,500 करोड़ रुपये निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इससे करीब 55 हजार रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही एक लाख युवाओं को टेक्सटाइल सेक्टर के अनुरूप प्रशिक्षण देने और एक हजार नए निर्यातक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
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