विश्वविद्यालय प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि विद्या का आध्यात्मिक आलय है : एडीएन बाजपेयी

बिलासपुर, बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी के पदमुक्ति अवसर पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय परिवार ने उनके पांच साल के कार्यकाल को याद करते हुए उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ विदाई दी। समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और उनके योगदान को सराहा।
कार्यक्रम की शुरुआत कुलसचिव डॉ. तारनीश गौतम के स्वागत भाषण से हुई। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. एच.एस. होता ने किया, जबकि संचालन डॉ. अतुल दुबे ने किया।
‘स्वर्णकाल’ के रूप में याद किया गया कार्यकाल
समारोह में वक्ताओं ने आचार्य बाजपेयी के पांच वर्ष के कार्यकाल को विश्वविद्यालय का “स्वर्णकाल” बताया। उनके कार्यकाल में कर्मचारियों के वेतनमान में वृद्धि, पदोन्नति प्रक्रिया में सुधार, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और पुराने भवन से नए परिसर में सफल स्थानांतरण जैसे कई अहम काम हुए।
खेल संकाय के डीन डॉ. प्रमोद तिवारी ने भी उनके प्रशासनिक कौशल और संवेदनशील नेतृत्व की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने एक सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल तैयार किया।
‘अनुशासन, करुणा और उत्कृष्टता’ बना संस्थान का मूल मंत्र
वर्तमान कुलपति प्रो. एल.पी. पटेरिया ने आचार्य बाजपेयी को एक मजबूत शैक्षणिक व्यवस्था खड़ी करने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि उनके दिए गए “अनुशासन, करुणा और उत्कृष्टता” के सिद्धांत अब विश्वविद्यालय की पहचान बन चुके हैं।
भविष्य के लिए दिए सुझाव
अपने संबोधन में आचार्य बाजपेयी ने विश्वविद्यालय के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर ध्यान दिलाया। उन्होंने 100 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों, 127 एकड़ भूमि के उपयोग, गेस्ट हाउस और कुलपति आवास जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध करने, शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।
भावुक विदाई संदेश
समारोह के अंत में आचार्य बाजपेयी ने भावुक शब्दों में कहा, “मैं पद से मुक्त हो रहा हूं, लेकिन इस विश्वविद्यालय परिवार से नहीं।” उन्होंने खुद को एक आध्यात्मिक व्यक्ति बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि विद्या का आध्यात्मिक केंद्र है।
उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा मांगी और भविष्य में भी सेवा का अवसर मिलने की इच्छा जताई।
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