संजय सिंह की मौत के बाद IAS एम. देवराज के खिलाफ व्यापारी और अधिकारियों का तनाव बढ़ा

नोएडा के डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) संजय सिंह के सुसाइड ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश के सबसे ताकतवर आईएएस एम. देवराज को सुर्खियों में ला दिया है. एम. देवराज ने जब से जीएसटी विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, तब से व्यापारी से लेकर अधिकारी तक… सभी तनाव में हैं. यहां तक की कानपुर में व्यापारियों ने पलायन तक शुरू कर दिया था. इससे पहले एम. देवराज के पास बिजली विभाग की जिम्मेदारी थी तो वहां पर कर्मचारी सड़क पर उतर आए थे.

पहले जानते हैं कि IAS एम. देवराज कौन हैं? तमिलनाडु के विरुधुनगर के रहने वाले 1996 बैच के आईएएस अफसर एम. देवराज के पास अभी नियुक्ति और कार्मिक के साथ ही स्टेट टैक्स विभाग है. वह रामपुर, बरेली, बदायूं, झांसी, उन्नाव जैसे बड़े जिलों के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं. स्टेट टैक्स विभाग में आने से पहले वह टेक्निकल एजुकेशन विभाग के प्रमुख सचिव थे. उससे पहले उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन भी रह चुके हैं.

सीएम योगी के करीबी अफसर हैं एम. देवराज

एम. देवराज की छवि बेहद की ईमानदार और सख्त अफसर के रूप में है. यही वजह है कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सबसे करीबी अफसर माना जाता है और उनके पास उन्हीं विभाग का जिम्मा है, जिसे खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पास रखा है. पिछले साल ही एम. देवराज को प्रमुख सचिव, नियुक्ति और कार्मिक के साथ ही स्टेट टैक्स विभाग का जिम्मा मिला. इसके बाद उनके फैसलों ने जीएसटी अधिकारियों की नींद उड़ा दी है.

एम. देवराज ने कैसे विभागीय अधिकारियों पर कसा शिकंजा

यूपी के राजस्व का 70 फीसदी हिस्सा स्टेट टैक्स से आता है. ऐसे में सीएम योगी ने एम. देवराज को विभाग की जिम्मेदारी देकर प्रदेश का राजस्व बढ़ाने का टारगेट दिया था. इस टारगेट को पूरा करने के लिए प्रमुख सचिव एम. देवराज ने जीएसटी विभाग के अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू किया. नौबत यहां तक आ गई कि छुट्टी के दिन भी दफ्तर खोले जाने लगे और खुद प्रमुख सचिव एम. देवराज ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके अधिकारियों को टारगेट देने लगे.

पूरे प्रदेश में छापेमारी, व्यापारियों ने बंद कर दिए थे दुकान

पिछले साल ही पूरे प्रदेश में छापेमारी की गई. जीएसटी अधिकारियों के खौफ के कारण कई जिलों में व्यापारियों ने अपने दुकान बंद कर दिए. कानपुर से लेकर गोरखपुर तक… व्यापारी सड़क पर उतर आए. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दखल के बाद व्यापारियों पर छापेमारी रोकी गई. इसके बावजूद जीएसटी अधिकारियों पर टैक्स कलेक्शन को बढ़ाने का दवाब बना रहा. कानपुर में गुटखा कारोबारियों के गोदाम के बाहर जीएसटी अधिकारियों ने डेरा ही डाल दिया.

कानपुर में गुटखा कारोबारी करने लगे थे पलायन

नतीजा यह हुआ कि कानपुर से गुटखा कारोबारी पलायन करने लगे. इसकी भनक जब सरकार के आला-अधिकारियों को हुई तो आनन-फानन में जीएसटी अधिकारियों को हटाया गया. कानपुर के ही एक व्यापारी ने टीवी9 डिजिटल को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अभी भी जीएसटी अधिकारियों के द्वारा अनैतिक दबाव बनाया जाया जा रहा है. इसका असर धंधे पर पड़ रहा है और हम व्यापारी डरे हुए हैं. डर का माहौल अधिकारियों में भी है.

अधिकारियों ने छोड़ा स्टेट टैक्स का वॉट्सऐप ग्रुप

नोएडा के डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) संजय सिंह के सुसाइड के बाद अब जीएसटी अधिकारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है. कल यानी सोमवार को हुई बैठक में जीएसटी आफीसर्स सर्विस एसोसिएशन ने विभाग के तनावपूर्ण कार्य-संस्कृति पर गहरी नाराजगी जताई है. एसोसिएशन ने स्टेट टैक्स के आधिकारिक वॉट्सऐप ग्रुप से सभी अधिकारियों को बाहर निकल जाने का फैसला किया. साथ ही होली के बाद मास कैजुअल लीव लेकर विरोध करने निर्णय लिया गया.

एम. देवराज के खिलाफ हुआ था 65 घंटे का प्रदर्शन

इससे पहले एम. देवराज के जिम्मे यूपी का बिजली विभाग था. दो साल के अंदर एम. देवराज ने 250 से अधिक इंजीनियरों को सस्पेंड या टर्मिनेट किया. आईएएस एम. देवराज को हटाने के लिए बिजली कर्मचारियों ने सबसे बड़ा आंदोलन भी किया था. 65 घंटे तक प्रदर्शन किया गया, लेकिन एम. देवराज हटाए नहीं गए. एम. देवराज के खौफ का असर रहा कि बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारी हर वक्त अपनी नौकरी पर संकट के बादल मंडराते हुए देखते थे.

जब बोले एम. देवराज- नौकरी नहीं करने दूंगा…

गोरखपुर में समीक्षा बैठक के दौरान एम. देवराज ने अधिकारियों से यहां तक कह दिया था कि बिजली का बकाया जल्दी जमा करवाओ, नहीं तो नौकरी नहीं करने दूंगा. खास बात है कि एम. देवराज के रहते हुए ही प्रदेश में सबसे अधिक बिजली संकट रहा. बिजली व्यवस्था चौपट हो गई. वहीं एम. देवराज ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसना जारी रखा. वह ऊर्जा मंत्री की भी न सुनते थे. बाद में विभागीय मंत्री से विवाद के बाद उनकी बिजली विभाग से विदाई हुई.

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