सिंधु जल संधि पर भारत के प्रहार से कराह रहे कंगाल पाकिस्तान के सामने नया संकट, वॉटर प्रोजेक्ट के लिए पैसे ही नहीं
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में जल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। भारत के सिंधु जल संधि को निलंबित करने से पाकिस्तान के बड़े क्षेत्र में पानी की कमी होने का खतरा मंडरा रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान मे जल आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाएंं भी रुक सकती हैं। फंड की कमी के चलते पाकिस्तान में जल संसाधन से जुड़े प्रोजेक्ट में रुकावट आने का खतरा है। इसके चलते भीषण गर्मी में आम लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने जल क्षेत्र में 969 अरब रुपए की जरूरत होने के बावजूद सिर्फ 179 अरब रुपए के एलोकेशन का प्रस्ताव दिया है। ऐसे में खासतौर से अगले फाइनेंशियल ईयर में वॉटर सेक्टर के डेवलपमेंट को फंड की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है, जो परेशानी का सबब बनेगा।
सिंधु नदी पर टेलीमेट्री सिस्टम
पाकिस्तान की मिनिस्ट्री ऑफ वॉटर रिसोर्स ने चल रही और प्लान की गई डेवलपमेंट स्कीम के लिए 969 अरब रुपए की जरूरत का अनुमान लगाया है। आने वाले डेवलपमेंट बजट में 41 चल रहे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिसमें एक नई स्कीम जोड़ी गई है। सरकार ने सिर्फ 179 अरब रुपए देने के प्रस्ताव ने पूरी स्कीम को मुश्किल में डाल दिया है।
सिंधु जल संधि और पाकिस्तान की मुश्किल
पाकिस्तान के लिए जल सुरक्षा के मुद्दे पर संकट लगातार बना हुआ है। भारत ने बीते साल पाकिस्तान के साथ दशकों पुराने सिंधु जल समझौते से बाहर आने का ऐलान किया था। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने यह फैसला लिया था। भारत ने कहा था कि पानी और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते हैं।
पाकिस्तान के सामने बड़ा सवाल
पाकिस्तान की बड़ी आबादी के लिए भारत से बहकर जाने वाला पानी जीवन-मरण का प्रश्न है। नदियों पानी का बहाव कम होने से पाकिस्तान में खेती-बाड़ी, बिजली उत्पादन और लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान ने लगातार इस मुद्दे को लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है और भारत को घेरने की कोशिश की है।
