शासकीय भूमि अतिक्रमण मुक्त

दुर्ग। जल संसाधन विभाग के अधीन हनोदा माइनर नहर, जो नगर पालिक निगम रिसाली क्षेत्रांतर्गत डी.पी.एस. स्कूल से वी.आई.पी. नगर तक प्रवाहित है। उक्त नहर क्षेत्र एवं विभागीय स्वामित्वाधीन शासकीय भूमि पर विगत कई वर्षों से किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाने हेतु जल संसाधन विभाग एवं नगर पालिक निगम रिसाली द्वारा संयुक्त रूप से विशेष अभियान संचालित कर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही संपादित की गई।

नहरें एवं उनसे संबद्ध शासकीय भूमि केवल विभागीय परिसंपत्तियां मात्र नहीं हैं, बल्कि वे सार्वजनिक उपयोगिता की महत्वपूर्ण संरचनाएं हैं, जिनका संरक्षण, अनुरक्षण एवं अतिक्रमण मुक्त रखा जाना जनहित, जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन तथा विभागीय दायित्वों के सुचारू निर्वहन के लिए अत्यंत आवश्यक है। नहर क्षेत्र में किया गया अवैध अतिक्रमण न केवल शासकीय भूमि पर अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में आता है, बल्कि इससे नहरों के नियमित अनुरक्षण, निरीक्षण, मरम्मत कार्यों एवं अन्य विभागीय गतिविधियों में भी अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न होती हैं, जिससे सार्वजनिक परिसंपत्तियों की उपयोगिता एवं प्रभावशीलता प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है।

कलेक्टर  अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन एवं निर्देशानुसार संचालित इस कार्यवाही के पूर्व संबंधित अतिक्रमणकर्ताओं को स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने हेतु पर्याप्त अवसर प्रदान किया गया था। निर्धारित अवधि समाप्त होने के उपरांत जल संसाधन विभाग एवं नगर पालिक निगम रिसाली के संयुक्त दल द्वारा स्थल पर पहुंचकर विधिसम्मत प्रक्रिया के अंतर्गत अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई।

उक्त संयुक्त अभियान में नगर पालिक निगम रिसाली के  योगेश सूरे, सहायक राजस्व निरीक्षक,  संतोष तिवारी, सहायक राजस्व निरीक्षक,  रामेशर राम, सहायक राजस्व निरीक्षक,  खिलेश कोसरे, प्लेसमेंट कर्मचारी,  भावेश सोनवानी, प्लेसमेंट कर्मचारी,  झामुनंद, प्लेसमेंट कर्मचारी,  दयालदास, प्लेसमेंट कर्मचारी एवं  किरण देशमुख, प्लेसमेंट कर्मचारी तथा जल संसाधन विभाग के  भास्कर यादव, उप अभियंता, सुश्री भावना सिन्हा, उप अभियंता, सुश्री साक्षी सिंह, उप अभियंता एवं  प्रखर यादव, अमीन की सक्रिय सहभागिता रही।

कार्यपालन अभियंता  आशुतोष सारश्वत ने बताया कि जल संसाधन विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि विभाग के अधीनस्थ नहरों, जल संरचनाओं, अनुरक्षण मार्गों एवं शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण शासन के हितों, विभागीय अधिकारों तथा व्यापक जनहित के प्रतिकूल है। शासकीय भूमि पर अनाधिकृत कब्जा अथवा अतिक्रमण किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है तथा ऐसी प्रवृत्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही निरंतर जारी रहेगी।

विभाग द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र अंतर्गत स्थित समस्त नहरों, जल संरचनाओं एवं विभागीय भूमि की सतत निगरानी की जा रही है। जहां कहीं भी शासकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां बिना किसी भेदभाव के नियमानुसार आवश्यक वैधानिक कार्यवाही करते हुए शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। शासकीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण एवं उनके मूल उद्देश्य के अनुरूप उपयोग बनाए रखना विभाग की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में सम्मिलित है।

जल संसाधन विभाग द्वारा आमजन से अपील की गई है कि वे शासकीय भूमि, नहरों एवं अन्य सार्वजनिक उपयोगिता की संरचनाओं पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न करें तथा सार्वजनिक परिसंपत्तियों के संरक्षण में प्रशासन को सहयोग प्रदान करें। शासकीय भूमि एवं जल संसाधन संरचनाओं का संरक्षण सामूहिक उत्तरदायित्व है, जिसके माध्यम से जनहित एवं सार्वजनिक सुविधाओं की निरंतरता को प्रभावी रूप से बनाए रखा जा सकता है।

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