भारत-म्यांमार संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा, राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग पहुंचे गयाजी

गयाजी: म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग भारत की अपनी पांच दिवसीय यात्रा के तहत शनिवार को बिहार के गयाजी पहुंचे। गया पहुंचने पर बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने उनका अभिनंदन और स्वागत किया। म्यांमार के राष्ट्रपति बोधगया स्थित प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर में दर्शन करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि म्यांमार के राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। गया हवाई अड्डा पहुंचने पर राष्ट्रपति का राज्य सरकार की ओर से स्वागत किया गया। बताया गया कि राष्ट्रपति महाबोधि मंदिर के अलावा सुजाता मंदिर भी जाएंगे और पूजा अर्चना करेंगे।

भारत- म्यांमार संबंध

बताया गया कि राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग एक जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद उनकी भारत की यह पहली यात्रा है। यू मिन आंग ह्लाइंग भारत में एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे। इस यात्रा के दौरान उनके साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी है, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और बिजनेस जगत के नेता शामिल होंगे। 2 जून को, वे बिजनेस और उद्योग से जुड़ी बातचीत और साइट विजिट के लिए मुंबई भी जाएंगे।

कृषि मंत्री ने किया स्वागत

बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर लिखा कि आज गयाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पर म्यांमार संघ गणराज्य के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के पावन बोधगया आगमन के अवसर पर बिहार सरकार की ओर से सौजन्यता प्रकट कर उनका हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने आगे लिखा कि भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया की इस पवित्र धरती पर राष्ट्रपति का आगमन भारत-म्यांमार के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है।

गयाजी में म्यांमार के राष्ट्रपति

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और म्यांमार के बीच सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, बौद्ध विरासत एवं पारस्परिक विकास के संबंध निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहे हैं। बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम ने भी अपनी भारत यात्रा बोधगया से शुरू की थी। यह वह स्थान है, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। उन्होंने महाबोधि मंदिर में प्रार्थना की थी।

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