बंगाल चुनावों के नतीजों से पहले गुजरात में लांच हुई झालमुड़ी, गुजराती बिजनेसमैन चंदूभाई ने मौके पर मारा चौका

अहमदाबाद: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रचार के दौरान झालमुड़ी खाकर चौंका दिया था। पीएम मोदी का झारग्राम दौरे का यह अंदाज सोशल मीडिया पर न सिर्फ वायरल हुआ था बल्कि ट्रेंड बन गया था, ऐसे में जब बंगाल में किसकी सरकार बनेगी? और ईवीएम खुलनी बाकी हैं तब गुजरात के बिजनेसमैन चंदूभाई विरानी ने मौके पर चौका मारा है। उन्होंने झालमुड़ी लांच कर दी है। चंदूभाई विरानी गुजरात के प्रतिष्ठित बालजी वेफर्स के मालिक हैं। यह पश्चिम के इस राज्य का बड़ा नमकीन ब्रांड है, जो चिप्स, नमकीन के तमाम फ्लेवर्स के लिए जाना जाता है। अब बालाजी वेफर्स ने अपनी प्राेडक्ट रेंज में झालमुड़ी को भी शामिल कर लिया है।

चंदूभाई बोले-मोदी जी हमारे ब्रांड एंबेडर

देखो मोदी जी हमारे देश के ब्रांड एंबेसडर हैं। मोदी जी की वजह से भारत देश की पूरे देश में पहचान हुई है। गुजराती को बोलते हैं मौके पर चौका मारना। तो जहां लाभ मिलता है तो उपयोग करके लाभ लेना चाहिए। उन्होंने झालमुड़ी ली तो हम भी झालमुड़ी देंगे। क्योंकि हम गुजराती हैं। गुजराती का काम ही मौके पर चौका मारना। झालमुड़ी को सभी खा सकते हैं। चाहे वह छोटा हो या फिर बड़ा। गुजरात में इसे मुरमुरा बोलते हैं। इसे हम देते थे अब इस झालमुड़ी की तरह दे दिया। हमारा काम की ग्राहक को चाहिए, वो मिले। बंगाल में झालमुड़ी काफी ज्यादा लोकप्रिय है। प्रधानमंत्री ने 10 रुपये देकर झालमुड़ी ली थी। तब इस झालमुड़ी की चर्चा हो रही है।

10 रुपये से बने 5000 करोड़ के मालिक

बालाजी वेफर्स के मालिक चंदूभाई विरानी ‘झालमुड़ी’ लॉन्च को लेकर चर्चा में आए हैं। वह 5000 करोड़ रुपये की कंपनी बाला वेफर्स के मालिक हैं। उन्होंने 10 रुपये से 5000 करोड़ रुपये तक सफर तय किया है। उनकी कहानी प्रेरक है। चंदूभाई का पालन-पोषण एक गुजराती किसान परिवार में हुआ था। खेती के उत्पाद और खेती के औजार बेचने के बिजनेस में वह फेल हुए। इस नाकामी के बावजूद विरानी ने हार नहीं मानी। उन्होंने मुश्किल वक्त में सिनेमा की सीटों की मरम्मत करना, पोस्टर चिपकाना और थिएटरों में 1000 रुपये में स्नैक्स बेचना का काम भी किया। चंदूभाई विरानी ने 1982 में आलू के वेफर्स बनाने के बिजनेस के लिए अपनी पहली फैक्ट्री खोली। फैक्ट्री के सफल होने के बाद, उन्होंने 1992 में अपने भाई के साथ मिलकर ‘बालाजी वेफर्स प्राइवेट लिमिटेड’ की शुरुआत की। कंपनी में 7,000 लोग काम करते हैं, इनमें आधी महिलाएं हैं।

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