बाल यातना एवं मानव तस्करी के विरुद्ध जागरूकता हेतु विधिक शिविर आयोजित

बेमेतरा। बाल यातना एवं अवैध मानव तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा के तत्वावधान में ग्राम ओटेबंद में एक दिवसीय विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा संचालित विभिन्न जनहितकारी योजनाओं एवं विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। शिविर में उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए सहायक प्रतिरक्षा अधिवक्ता देवेंद्र साहू ने नालसा (मानव तस्करी एवं व्यावसायिक यौन शोषण के पीड़ितों हेतु योजना), 2015 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना मानव तस्करी, जबरन वेश्यावृत्ति, यौन शोषण एवं देह व्यापार के शिकार महिलाओं, बच्चों एवं अन्य व्यक्तियों को विधिक संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। योजना के अंतर्गत पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता, सुरक्षा, पुनर्वास तथा न्यायालयीन कार्यवाही में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।

प्रतिरक्षा अधिवक्ता अमन दुबे ने बताया कि मानव तस्करी एवं यौन शोषण के पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता के साथ-साथ मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं, जिससे वे सम्मानजनक जीवन की ओर पुनः अग्रसर हो सकें। इसी क्रम में प्रतिरक्षा अधिवक्ता आयुष शुक्ला ने नालसा (एसिड अटैक पीड़ितों को विधिक सेवाएं योजना) के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना एसिड हमले के पीड़ितों को न्याय एवं पुनर्वास उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है। इसके तहत पीड़ितों को निःशुल्क अधिवक्ता, मुआवजा प्राप्त करने में सहायता, उपचार एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाएं तथा अपराधियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही में सहयोग प्रदान किया जाता है।

प्रतिरक्षाधिवक्ता पी. राजेश्वरी ने नालसा (बच्चों के लिए बाल-मित्र कानूनी सेवाएं योजना), 2024 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना बच्चों को कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित, सहज एवं भयमुक्त वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई है। योजना के तहत बाल पीड़ितों, बाल अपराधियों, अनाथ एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को विशेष सहायता उपलब्ध कराई जाती है तथा उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाती है। वहीं प्रतिरक्षाधिवक्ता गीता दास एवं दुर्गा साहू ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (विधिक क्लीनिक) विनियम, 2011 के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विधिक क्लीनिकों के माध्यम से ग्रामीण एवं जरूरतमंद लोगों तक निःशुल्क कानूनी सहायता पहुंचाई जाती है। इन क्लीनिकों में कानूनी परामर्श, आवेदन लेखन, प्रकरणों की जानकारी तथा नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का कार्य किया जाता है। ग्रामों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, जेलों एवं न्यायालय परिसरों में ऐसे विधिक क्लीनिक संचालित किए जाते हैं।

शिविर के दौरान उपस्थित नागरिकों एवं श्रमिकों को विभिन्न विधिक योजनाओं एवं अधिकारों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली तथा उन्होंने विधिक सहायता से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा के सचिव के निर्देशानुसार आयोजित इस एक दिवसीय विधिक जागरूकता शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन समस्त लीगल एड डिफेंस काउंसिल एवं सहायक प्रतिरक्षा अधिवक्ताओं द्वारा किया गया।

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