सहनशीलता का संदेश देने वाली मां शीतला की गधा है सवारी, तलवार की जगह हाथ में है झाड़ू, चर्म रोगों का करती हैं नाश

सनातन संस्कृति में देवियों को अनेक रूपों में पूजा जाता है. जिनकी मान्यताएं भी अलग-अलग है. इन सभी देवियों की सवारियां भी भिन्न-भिन्न है. किसी देवी का स्वरूप शेर पर सवार है तो किसी का स्वरूप हाथी, उल्लू और बत्तख पर सवार है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी चमत्कारी देवी के स्वरूप के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी सवारी सबसे अद्भुत है.

इस अद्भुत सवारी वाली माता का नाम है शीतला माता, जो गर्दभ यानी गधे पर सवार हैं. सबसे खास बात इनके हाथों में देवी के अन्य स्वरूपों की भांति तलवार नहीं बल्कि झाड़ू है. सभी देवियों में शीतला माता का स्वरूप सबसे अलग है और हर साल चैत्र मास की अष्टमी तिथि को इनका प्राकट्य दिवस शीतला अष्टमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है.

शीतला माता को शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक भी कहा गया है. इन्हें बासी खाना और ठंडा जल अत्यंत प्रिय है. इसीलिए शीतला अष्टमी वाले दिन शीतला माता को प्रसन्न करने के लिए भक्त बासी भोजन का प्रसाद चढ़ाते है. साथ ही चर्म रोगों और कई प्रकार के रोगों से परिवार की सुरक्षा के लिए महिलाएं इनकी पूरे विधि विधान से शीतला अष्टमी पर पूजा भी करती है.

आखिर गधा ही क्यों है शीतला माता की सवारी
कर्मकांड ज्योतिषी पंडित मनीष उपाध्याय बताते हैं कि शीतला माता की सवारी वैशाख – नंदन है. जिसे गधा बोलते हैं वहीं, शीतला माता की सवारी है. उपाध्याय बताते हैं की शीतला माता की सवारी गधा इसलिए है क्योंकि यह बहुत ही सहनशीलता और धैर्य रखने वाला जानवर है. सब कुछ सहन करने के बाद भी इसके अंदर सहनशीलता होती है. बहुत अधिक वजन और परिश्रम करने की बावजूद भी इसका स्वभाव हमेशा सहनशील और सरल रहता है और शीतला माता भी सहनशीलता का ही संदेश देती है. इसीलिए वैशाख नंदन ( गधा ) इनकी सवारी है. गधे पर विराजमान शीतला माता सभी को सहनशीलता से रहने का संदेश देती है.

शीतला माता के एक हाथ में है झाड़ू
ज्योतिषी मनीष उपाध्याय बताते हैं कि शीतला माता अपने एक हाथ में झाड़ू, दूसरे हाथ में कलश धारण किए हुए है और उनके गले में नीम के पत्तों की माला रहती है. उपाध्याय बताते हैं कि शीतला माता ने अपने एक हाथ में झाड़ू इसलिए धारण किया है कि क्योंकि झाड़ू सफाई का प्रतीक है. अगर आप साफ सफाई रखोगे तो कोई भी रोग – दोष आपके पास नहीं आएगा और नीम की माला माता ने इसलिए गले में धारण की है क्योंकि नीम एक ऐसा औषधीय पौधा है. जो सभी कठिन रोगों को समाप्त करने की ताकत और क्षमता अपने अंदर रखता है.

पंडित मनीष उपाध्याय बताते हैं कि शीतला माता एक ऐसी चमत्कारी माता है जो अपने एक हाथ में झाड़ू, एक हाथ में कलश और गले में नीम के पत्तों की माला धारण करती हैं जिनका वाहन वैशाख नंदन यानी की गधा है. ऐसी माता की दिव्या पूजा आराधना साल में एक बार शीतला अष्टमी की पावन पर की जाती है.
 

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