नार्वे के PM ने आतंकवाद पर पाकिस्‍तान को दिया बड़ा झटका, कहा- कड़ा रुख अपनाना होगा, भारत की जीत!

ओस्लो: नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के बाद भारत के साथ आर्थिक संबंधों के लिए इसे एक "महान दिन" बताया है। इसके साथ ही सीमा-पार आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने नई दिल्ली के प्रति एकजुटता व्यक्त की है। ये भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत की तरह है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच मजबूत होती साझेदारी पर जोर दिया है जिसमें खासकर नई ‘ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ के जरिए क्लीन एनर्जी, कार्बन कैप्चर और रिन्यूएबल स्टोरेज पर है। उन्होंने EFTA देशों (नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड) के साथ हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते का जिक्र किया और इसे "बहुत दूरदर्शी" और "महत्वाकांक्षी" बताया।

नॉर्वे के प्रधानमंत्री स्टोरे ने कहा "भारत में निवेश करने में काफी दिलचस्पी दिखाई गई है जो भारत में रोजगार और लोगों की भलाई के लिए तो अच्छा है ही साथ ही नॉर्वे में रोजगार के लिए भी फायदेमंद है।" उन्होंने भारत की "युवा आबादी बहुत गतिशील अर्थव्यवस्था" को 100 अरब डॉलर के निवेश के बड़े लक्ष्य को हासिल करने में अहम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरशाही और तकनीकी मानकों जैसी चुनौतियों के बावजूद दोनों देशों के बीच "मकसद की एकता" बनी हुई है। कारोबार से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए भारत में एक EFTA डेस्क भी बनाया गया है।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का समर्थन

नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का समर्थन किया है। पाकिस्तान से प्रशिक्षित आतंकवादियों की तरफ से पहलगाम में किए गए आतंकी हमले के मामले में PM मोदी ने नॉर्वे को उसके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। PM स्टोर ने कहा "हमें किसी भी तरह के आतंकवाद के खिलाफ बहुत ही कड़ा रुख अपनाना होगा… हम उन देशों और लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं जिन्हें आतंकवाद का सामना करना पड़ता है। हमें इसके खिलाफ मिलकर खड़ा होना होगा।"

‘यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर ज्यादा दबाव बनाने की जरूरत’

इसके अलावा भारत और नॉर्वे के नेताओं ने जियो पॉलिटिक्स के दूसरे मुद्दों जैसे यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धों पर चर्चा की। वहीं जब रूस से भारत के ऊर्जा आयात को लेकर सवाल किया गया तो नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने रूस से भारत के ऐतिहासिक संबंधों के सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने कहा "भारत एक विशाल देश है जिसकी ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अपनी ज़रूरतें हैं… और नॉर्वे एक ऊर्जा निर्यातक देश होने के नाते इस मामले में भूमिका निभा सकता है।" हालांकि उन्होंने मॉस्को पर और ज्यादा "दबाव" बनाने की बात कही। उन्होंने कहा "यूक्रेन में चल रहे इस भयानक युद्ध को खत्म करने के लिए जिसमें लोगों की जान जा रही है और भारी तबाही मच रही है रूस पर और अधिक दबाव बनाना होगा ताकि वह बातचीत की मेज पर आए।

उन्होंने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत रूसी नेतृत्व के साथ अपने संपर्कों का इस्तेमाल "युद्धविराम सुनिश्चित करने" के लिए करेगा। स्टोर ने इस बात का जिक्र किया कि इस संघर्ष को समाप्त करने के मुद्दे पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके उद्देश्य समान हैं। हालांकि भौगोलिक स्थिति के कारण और नॉर्वे के रूस का NATO पड़ोसी होने के नाते दोनों के नजरिए में कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं।
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