सिंधु जल संधि पर भारत की मार से तड़प रहा पाकिस्तान, अंतरराष्ट्रीय मंच से लगाई दिल्ली से गुहार

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत के सामने गुहार लगाई है और नई दिल्ली से इस समझौते का सम्मान करने का आग्रह किया है। मंगलवार को दुशांबे में आयोजित उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन में पाकिस्तान ने कहा कि इस संधि को निलंबित करने का कोई भी प्रयास खतरनाक मिसाल कायम करेगा। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था।

दुशांबो में सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने भारत पर जल संसाधनों का राजनीतिकरण की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमा पार बहने वाली नदियों को प्रभावित करने वाले एकतरफा कदम जल सुरक्षा, खाद्य उत्पादन और जलवायु लचीलेपन से संबंधित गंभीर वैश्विक चुनौतियां पैदा कर सकते हैं।

समझौते का सम्मान करने की अपील

इस दौरान पाकिस्तान जल संसाधन मंत्री ने भारत से सिंधु जल समझौते का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता तंत्रों का मान रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस संधि को निलंबित करने का कोई भी प्रयास दुनिया भर के निचले प्रवाह वाले देशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा।

भारत ने संधि पर लगा दी है रोक

बीते साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इनमें सिंधु जल समझौते को निलंबित करना सबसे अहम था। इस समझौते पर भारत के एक्शन से पाकिस्तान तिलमिला उठा था और कहा कि पानी को रोकने का कोई भी कदम युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। बीते एक साल में पाकिस्तान ने कई बार आरोप लगाया है कि भारत ने पानी के बहाव में बाधा डाली है।

सिंधु जल संधि क्या है?

सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी का बंटवारा करती है
यह समझौता विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुआ था
इसके तहत भारत से बहने वाली 6 नदियों के पानी का बंटवारा हुआ है।
तीन पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान को मिलता है- सिंधु, झेलम और चिनाब
तीन पूर्वी नदियों के पानी का इस्तेमाल का अधिकार भारत के पास है- रावी, व्यास और सतलुज
पश्चिमी नदियों का पाकिस्तान को मिलने के बावजूद भारत इनके पानी का उपयोग कृषि, घरेलू जरूरतों और सीमित पनबिजली के लिए कर सकता है।

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