पीओके में हाफिज सईद के गुर्गों को नेता बनाने की तैयारी में पाकिस्तानी सेना, गिलगित चुनाव को हाईजैक करने में जुटी
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की सेना गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनाव में हाफिज सईद के गुर्गों को जिताने की पूरी तैयारी कर रही है। यहां 7 जून को चुनाव होने वाले हैं और दूसरे उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि सेना उनके चुनाव प्रचार को रोक रही है और हेरफेर कर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े उम्मीदवारों को जिताने की कोशिश कर रही है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक राजनीतिक संगठन के उम्मीदवारों को चुनाव में शामिल होने में मदद करने का आरोप लगा रहे हैं।
न्यूज 18 ने खुफिया सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पाकिस्तान की सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और शिया-बहुल गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (PMML) के उम्मीदवारों का समर्थन किया है। इस पार्टी को आम तौर पर LeT के संस्थापक हाफिज सईद से जुड़ा एक राजनीतिक मोर्चा माना जाता है।
पीओके में हाफिज के गुर्गों को जिताने की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सेना की एक आतंकी संगठन के गुर्गों को जिताने की कोशिशों ने स्थानीय राजनीतिक समूहों के बीच चिंताएं पैदा कर दी हैं। उनका आरोप है कि यह कदम क्षेत्र के राजनीतिक और वैचारिक परिदृश्य को नया रूप देने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है। सूत्रों ने बताया कि गिलगित-बाल्टिस्तान में PMML से जुड़े उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से उस क्षेत्र में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की आशंकाएं बढ़ गई हैं जहां शिया समुदाय आबादी का एक बड़ा हिस्सा है।
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) से जुड़े नेताओं समेत विपक्षी पार्टियों ने सेना पर आरोप लगाया है कि वह विरोधी पार्टियों को आजादी से चुनाव प्रचार करने से रोक रही है। सूत्रों के मुताबि PTI नेताओं और तहरीक तहफ़्फ़ुज़-ए-आईन पाकिस्तान (TTAP) गठबंधन के सदस्यों को कथित तौर पर इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर रोक दिया गया और उन्हें चुनावी रैलियों को संबोधित करने के लिए स्कार्दू जाने से मना कर दिया गया।
चुनाव में हेरफेर करवाने पंजाब से जाएंगे पुलिस जवान
आलोचकों ने असीम मुनीर और उनकी सेना पर यह आरोप भी लगाया है कि वे ऐसी नीतियों को फिर से लागू कर रहे हैं जो पूर्व सैन्य शासक जनरल ज़िया-उल-हक के दौर की याद दिलाती हैं। जनरल जिया ने पूरे पाकिस्तान में इस्लामीकरण की नीतियों को बढ़ावा दिया था। गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिया-बहुल इस क्षेत्र में सुन्नी इस्लामी समूहों को बढ़ावा देने का मकसद इस इलाके पर इस्लामाबाद की पकड़ को और मजबूत करना और ज्यादा राजनीतिक अधिकारों की मांगों का मुकाबला करना है।विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में और भी गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं जिनमें वोटर लिस्ट में हेरफेर और नकली बैलेट पेपर का चलन शामिल है। कुछ नेताओं ने संभावित ‘फॉर्म 47-शैली’ के हेरफेर की चेतावनी दी है। इसका मतलब पाकिस्तान के 2024 के आम चुनाव को लेकर है जहां विपक्षी दलों ने अधिकारियों पर वोटों की गिनती के दौरान नतीजों में बदलाव करने का आरोप लगाया था। सूत्रों ने यह भी बताया कि पंजाब सरकार के अधिकारियों ने चुनावों से पहले "नावी सुरक्षा ड्यूटी के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान में पंजाब पुलिस बल के 6,000 जवानों की तैनाती को मंजूरी दे दी है। इसका मकसद स्वतंत्र चुनाव को रोकना है।
