बारिश में हो सकता है 150 कॉलोनियों में जलभराव

नगर निगम का नालों की सफाई की ओर

भोपाल। इस बार बरसात में शहर की कॉलोनियों में बरसात के दौरान पानी भरना तय नजर आ रहा है। दरअसल, मानसून आने को सिर्फ डेढ़ माह बचा है, लेकिन शहर में कहीं भी नालों की सफाई होती नजर नहीं आ रही। बता दें कि शहर में 789 नाले हैं, इन नालों की सफाई नहीं होने से बरसात के दिनों में बावडिय़ा कला और होशंगाबाद रोड के साथ अरेरा कॉलोनी और शिवाजी नगर जैसे पॉश इलाकों के साथ निचली बस्तियों में भी पानी भर जाता है।
अमूमन हर साल 15 अप्रैल से नालों का सफाई अभियान 15 जून तक चलता है। नालों की सफाई के लिए 21 जोन में टीमें बंटी हुई हैं। नगर निगम के एएचओ अपने इलाके के नालों की सफाई के लिए जिम्मेदार होते हैं। निगम प्रशासन का दावा है कि नालों की सफाई के लिए 21 जेसीबी, 21 डंपर और 14 पोकलेन मशीनें मिलाकर 56 मशीनें लगी हुईं हैं। इस काम में 200 से ज्यादा लोग लगे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सफाई का काम कहीं भी नहीं दिखाई दे रहा है। वैसे भी अगर स्वच्छ सर्वे के मापदंडों की बात करें तो साल में दो बार नालों की सफाई तो होनी ही चाहिए।

बरसात में भरता है पानी


भोपाल टॉकीज से रेलवे स्टेशन, अशोका गार्डन, न्यू राजीव नगर, कैलाश नगर, आशिमा मॉल के पास की बस्ती, ललिता नगर, नयापुरा, सुभाष नगर, घोड़ा नक्कास, सैफिया कॉलेज रोड, करोंद शिव नगर, बावडिय़ाकलां, बाणगंगा, डिपो चौराहा पंचशील नगर, महामाई का बाग समेत अन्य इलाकों की 150 से अधिक कॉलोनियों में बरसात का पानी भरने के मामले सामने आते हैं।

 अप्रैल से शुरू हो जानी चाहिए सफाई मुहिम


जानकारों के अनुसार जून के पहले हफ्ते में प्री मानसून की शुरुआत हो जाती है। इससे पहले ही शहर के सभी नालों की सफाई हो जानी चाहिए। नालों की सफाई का काम अप्रैल महीने से शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि उनकी सफाई के साथ-साथ नालों को रिपेयर भी करना होता है। सफाई के तत्काल बाद ही नाले से निकले कचरे को डंपरों में भरकर हटा देना चाहिए। लेकिन, सफाई कर्मचारी नाले से निकला कचरा गीला होने के कारण उसको वहीं नाले के बगल में सूखने के लिए रख देते हैं। यही कचरा सूखने के बाद हवा से उडक़र वापस नाले में चला जाता है। नालों में गंदगी होने का एक बड़ा कारण यह भी है।
 

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