पटना में AI शिखर सम्मेलन में रोके जाने पर भड़के छात्र, DM-SSP के सामने जमकर हंगामा

पटना: बिहार की राजधानी पटना में AI शिखर सम्मेलन के दिन जमकर हंगामा हुआ। बिहार AI शिखर सम्मेलन के दौरान छात्र भी वहां जाना जा रहे थे। लेकिन BPSC TRE 4 परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के हालिया रुख को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया।

बिहार AI शिखर सम्मेलन में छात्रों का हंगामा

बिहार AI शिखर सम्मेलन में एंट्री न मिलने से छात्र भड़क गए। दर्जनों की संख्या में छात्रों ने गेट पर ही हंगामा कना शुरू कर दिया। इस दौरान DM और SSP भी मौके पर ही मौजूद थे। हंगामे की खबर मिलते ही जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा मौके पर पहुंचे और छात्रों को समझाया। इसके बाद जाकर छात्र शांत हुए। इस शिखर सम्मेलन का आयोजन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कराया है।

शुक्रवार को सीएम सम्राट ने की थी बड़ी घोषणा

इससे पहले शुक्रवार को ही सीएम सम्राट चौधरी ने BPSC TRE 4 अभ्यर्थियों के आंदोलन पर पर संज्ञान लिया था। इसी को लेकर उन्होंने शिक्षा विभाग की बड़ी बैठक बुलाई और शुक्रवार को घोषणा की कि बिहार में अगले पांच वर्षों के दौरान एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। यह निर्णय पटना में आयोजित उच्च स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसका उद्देश्य राज्य के सभी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।

CMO की ओर से जारी किया गया था बयान

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अगले पांच वर्षों में हर वर्ष कम से कम 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की दर से कुल एक लाख शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।’ उन्होंने कहा कि नियुक्तियों से संबंधित विज्ञापन प्रत्येक वर्ष जुलाई महीने में जारी किए जाएंगे। माना जा रहा 

है कि टीआरई 4 के लिए भी जुलाई से ही पहले ही विज्ञापन आ सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

नई नीति बनाने का भी निर्देश

सम्राट चौधरी ने कहा कि शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए एक नीति बनाने का निर्देश दिया गया है कि महिला शिक्षकों का तबादला उनके घर के निकटवर्ती पंचायत में और पुरुष शिक्षकों का तबादला उनके घर के निकटवर्ती प्रखंड में किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य के स्कूलों में विद्यार्थियों को वर्दी की आपूर्ति ‘जीविका’ के माध्यम से की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे समय पर वर्दी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और महिलाओं की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

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