टैरिफ के साइड इफेक्ट! अमेरिका को पछाड़ चीन बना भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर
नई दिल्ली: अमेरिका को पछाड़कर चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बन गया है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 151 अरब डॉलर पहुंच गया। इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड 140.2 अरब डॉलर रहा। हालांकि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर पहुंच गया। भारत से चीन को निर्यात 36 फीसदी बढ़कर 19.5 अरब डॉलर पहुंच गया जबकि आयात 16 फीसदी बढ़कर 131.6 अरब डॉलर रहा। इसके साथ ही चीन भारत का तीसरा बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन और सबसे बड़ा इम्पोर्ट सोर्स बन गया।
दूसरी ओर अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस कम हो गया। भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट 0.9 फीसदी तेजी के साथ 87.3 अरब डॉलर पहुंच गया जबकि आयात 16 फीसदी बढ़कर 52.9 अरब डॉलर रहा। हालांकि अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बना हुआ है। पश्चिम एशिया में युद्ध और अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत का गुड्स एक्सपोर्ट 2025-26 में 441.8 अरब डॉलर के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जो पिछले साल से मुकाबले 1 फीसदी अधिक है।
देश का व्यापार घाटा
हालांकि इस दौरान देश के आयात भी 7.5 फीसदी उछलकर 775 अरब डॉलर पहुंच गया। इस तरह देश का व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष में 333 अरब डॉलर रहा। मार्च में एक्सपोर्ट 7.6 फीसदी गिरकर 38.9 अरब डॉलर रहा। साथ ही ट्रे़ड डेफिसिट भी 20.7 अरब डॉलर रह गया जो नौ महीने में सबसे कम है। हालांकि इस दौरान आयात भी 6.4 फीसदी घटकर 59.6 अरब डॉलर रह गया। सर्विसेज को भी मिला लिया जाए तो पिछले फाइनेंशियल ईयर में एक्सपोर्ट 4 फीसदी बढ़कर र860.1 अरब डॉलर रहा जबकि आयात 6.4 फीसदी उछलकर 920 अरब डॉलर रहा।
- अमेरिका को पछाड़कर चीन बना भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर
- भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 151 अरब डॉलर पहुंच गया
- 2025-26 में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड 140.2 अरब डॉलर रहा
- चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर पहुंच गया
इस बीच मार्च में पश्चिम एशिया क्षेत्र को एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट में 50 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा कि मार्च में पश्चिम एशिया को एक्सपोर्ट 57.9 फीसदी गिरावट आई जबकि आयात 51.6 फीसदी गिर गया। भारत ने वहां हर महीने 6 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया लेकिन मार्च में यह आंकड़ा गिरकर 2.5 अरब डॉलर रह गया। यानी पिछले महीने एक्सपोर्ट में 3.5 अरब डॉलर की गिरावट आई।
