2 दिन भाजपा की ‘पाठशाला’, बूथ प्रबंधन-एआई पर जोर

रायपुर, चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए भाजपा ने संगठन के भीतर व्यापक प्रशिक्षण अभियान शुरू करने की तैयारी की है। सभी जिलों में 5 मई से 20 मई के बीच दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस ‘पाठशाला’ में बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के पदाधिकारी शामिल होंगे।

प्रशिक्षण सत्र में पारंपरिक मुद्दों तक सीमित रहने के बजाय 11 विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। इसमें भाजपा का इतिहास, संगठन की कार्यप्रणाली, विचारधारा और संस्कार के साथ आईटी, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे विषय शामिल हैं।

चुनावी प्रबंधन से जुड़े सत्र में बूथ मैनेजमेंट, मतदाता संपर्क, लाभार्थी वर्ग तक पहुंच, डेटा आधारित रणनीति और चुनाव के दौरान अचानक उठे मुद्दों पर त्वरित प्रतिक्रिया का तरीका बताया जाएगा। प्रशिक्षण विभाग के प्रदेश संयोजक अवधेश जैन ने बताया कि 489 मंडल में प्रशिक्षण हो गया है।

अब जिलास्तर पर होगा। चुनावी राजनीति में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया और एआई के जरिए जनसंपर्क, प्रचार और सूचना प्रबंधन के नए तरीके विकसित हो रहे हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को इन तकनीकों के प्रति प्रशिक्षित करना आवश्यक हो गया है, ताकि वे बदलती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

नए-पुराने पदाधिकारी होंगे शामिल

प्रशिक्षण की खास बात यह है कि इसमें केवल नए कार्यकर्ताओं के साथ अनुभवी और पुराने पदाधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। पार्टी मानती है कि अनुभव और नई तकनीक का समन्वय संगठन को और मजबूत बनाएगा। प्रत्येक जिले में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय प्रशिक्षण में जिला कार्यसमिति के सभी सदस्य, मंडल अध्यक्ष, महामंत्री और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी शामिल होंगे।

अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं को पहुंचाने का टास्क

भाजपा की प्रांतीय प्रशिक्षण कार्यशाला में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का टास्क सौंपा गया। मतलब साफ है कि कार्यकर्ता अब संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित रहने के बजाय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।

इस तरह वे एक तरफ संगठन और सरकार के बीच सेतु बनेंगे तो दूसरी ओर जनता के लिए सर्विस प्रोवाइडर की भी भूमिका निभाएंगे। कार्यकर्ताओं को लाभार्थियों तक पहुंच बढ़ाने का तौर-तरीका सिखाया जाएगा ताकि वे जमीनी फीडबैक जुटाकर योजनाओं के प्रचार-प्रसार को प्रभावी बनाएंगे।

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